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सरपंच पति के हौसले बुलंद, सच लिखने की कीमत चुकाता पत्रकार, दिनदहाड़े रास्ता रोककर किया,हमला,मामला दर्ज

SC-ST केस में फंसाने की धमकी,पत्रकारों में रोष।
सांवर मल शर्मा
भीलवाड़ा@गांव की सत्ता, रसूख और दबंगई जब सिर चढ़कर बोलने लगे तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी निशाने पर आ जाता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला फुलियाकलां थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां रात्रि चौपाल की खबर प्रकाशित करना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। सरपंच पति के हौसले इस कदर बुलंद हो गए कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर पत्रकार पर दिनदहाड़े जानलेवा हमला कर दिया और खुलेआम कहा तेरी पत्रकारिता आज निकाल देता हूं। संवाददाता सत्यनारायण टेलर निवासी नई-अरवड ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि दिनांक 17 दिसंबर 2025 को ग्राम अरवड में आयोजित रात्रि चौपाल कार्यक्रम का उन्होंने नियमानुसार कवरेज किया, जो समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ। इसी खबर से बौखलाए रामलाल पिता माधुलाल गुर्जर निवासी सरदारपुरा ने पहले फोन कर ऐलानिया धमकी दी कि वह उसकी खबरें क्यों छापता है और उसे उसकी औकात” दिखाएगा।
धमकियों के बाद दबंगई ने हिंसक रूप ले लिया। दिनांक 24 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 9.30 बजे, जब पत्रकार अपने काम से बस स्टैंड की ओर जा रहे थे, तभी रामलाल गुर्जर अपने साथियों ईश्वर गुर्जर, गोपा रेगर, रामप्रसाद रेगर व महाबीर खारोल के साथ एक राय होकर पहुंचा और रास्ता रोक लिया। आरोप है कि रामलाल ने पत्रकार का कॉलर पकड़ते हुए कहा बहुत खबरें छापता है, आज तुझे सबक सिखा देता हूं, तेरी जिंदगी खराब कर दूंगा।” इसके बाद आरोपितों ने लात-घूंसे बरसाए, गले व कंधे पर चोट मारी, हाथ पर दांत से काटा और पेट में भी गंभीर चोट पहुंचाई।
मारपीट के बाद भी दबंगों का हौसला नहीं थमा। आरोपितों ने जाते-जाते पत्रकार को धमकाया कि यदि इस घटना की रिपोर्ट थाने में दी तो उसके खिलाफ झूठा एससी-एसटी एक्ट का मामला दर्ज करवा दिया जाएगा और वह सारी जिंदगी पत्रकारिता करना भूल जाएगा। खुद को “बड़ी गैंग” का आदमी बताते हुए जान से मारने की धमकी भी दी गई।
घटना के बाद घायल पत्रकार ने पुलिस थाना फुलियाकलां पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 115(2), 126(2) व 189(2) में मामला दर्ज कर लिया है। CCTNS के माध्यम से एफआईआर दर्ज कर जांच थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह को सौंपी गई है।
इस घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर कर दिया है कि गांवों में सत्ता की आड़ लेकर किस तरह सच लिखने वालों को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। पत्रकार संगठनों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग उठ रही है। मामला अब सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा वार बन चुका है।

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