अतिरिक्त चार्ज डॉक्टर नदारद, स्टाफ की कमी से चरमराई व्यवस्था,नर्सिंग स्टाफ लिख रहा दवाइयां और कर रहा वितरण..
डॉक्टर सहित एएनएम,एलएचवी,आशा सुपरवाइजर का पद खाली,अतिरिक्त चार्ज पर लेकिन नियमित नहीं आते.
फुलिया कलां @(किशन वैष्णव)ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में करीब सवा करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई खामोर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी)आज भी अपनी मूलभूत जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रही है। सबसे गंभीर और चौंकाने वाली स्थिति यह है कि 16 साल बाद भी इस पीएचसी में आज तक एक भी प्रसव (डिलीवरी) नहीं कराया गया है। जिस भवन को मातृत्व सुरक्षा और प्राथमिक उपचार का केंद्र बनाया गया था, वह आज भी अधूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रतीक बनकर रह गया है।ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल बनने के बाद उम्मीद थी कि अब गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा,लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी प्रसूताओं को शाहपुरा या गुलाबपुरा ले जाना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में यह दूरी परिवारों के लिए परेशानी और जोखिम दोनों बढ़ा देती है।कई बार रास्ते में ही प्रसव हो गया है तो कई बार परिजनों पर अव्यवस्था आफत बन गई है।
अस्पताल में डॉक्टर नहीं, व्यवस्था सीमित स्टाफ के भरोसे..
शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे जब भास्कर पत्रकार पीएचसी पहुंचे तो अस्पताल में कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। न ओपीडी व न डॉक्टर के कक्ष में डॉक्टर दिखाई दिया और न ही पूरी नर्सिंग व्यवस्था सक्रिय थी।फार्मासिस्ट की जगह केवल अतिरिक्त व्यवस्था पर लगाया कर्मचारी साखलिया उप स्वास्थ्य केंद्र के सीएचओ मुकेश कुमावत मौजूद थे, जो मरीजों को दवाइयां देने के साथ रजिस्टर में एंट्री भी कर रहे थे।अस्पताल की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं एक सीमित स्टाफ के भरोसे चलती दिखाई दीं।इसके करीब एक घंटे बाद 10:30 बजे दोबारा स्थिति देखने पत्रकार अस्पताल पहुंचा पर फार्मासिस्ट की जगह मेल नर्स सेकंड शंकर रैगर मौजूद मिले। उन्होंने मरीज की पर्ची तैयार की, दवाइयां लिखीं और वितरण भी किया।यानी अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्सिंग स्टाफ ही पर्ची,दवा और प्राथमिक सलाह जैसी जिम्मेदारियां निभा रहा है।जो सिस्टम के खिलाफ तो है लेकिन विभाग इसे व्यवस्था मान रहा है शायद..?वही अस्पताल में डिलीवरी नहीं होती सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक खुलता है और ताला लगा दिया जाता है।रविवार को सिर्फ एक कर्मचारी मौजूद रहता है जो पर्ची भी लिखता हैं और।दवाइयां भी देता है।हालत ये हैं कि संडे को केवल 2 घंटे अस्पताल खुलता है और बंद हो जाता है सिर्फ एक कर्मचारी जिसे व्यवस्थार्थ लगाया जाता है।फार्मासिस्ट अभी छुट्टी पर है नहीं तो वो दूर के होने के कारण वो अस्पताल के क्वाटर में ही रहते थे और हर रविवार उनकी ही।ड्यूटी होती है पर्ची बनाना और दवाइयां देने की।
अतिरिक्त चार्ज व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावी नहीं…
अस्पताल में एक ANM को अतिरिक्त चार्ज पर लगाया गया है,लेकिन शनिवार को वह भी मौके पर मौजूद नहीं मिली।वहीं आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विनोद कुमार शर्मा को सप्ताह में तीन दिन और जनता हॉस्पिटल शाहपुरा के डॉ. भव्य भारद्वाज को 3 दिन के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है,लेकिन इसके बावजूद नियमित डॉक्टर की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।वही फार्मासिस्ट और लेब टेक्नीशियन छुट्टी पर है।पीछे सिर्फ कंप्यूटर ऑपरेटर सुरेश के अलावा 2 स्टाफ ही बचे जिसमें मेल नर्स द्वितीय शंकर रैगर,ओर लेब असिस्टेंट छोटू बलाई,इसके अलावा अतिरिक्त सीएचओ साखलिया को शनिवार को वैकल्पिक व्यवस्था पर लगाया गया।अस्पताल में सवा करोड़ रुपए जरूर खर्च हुए हैं लेकिन सिर्फ दवाइयां देने के लिए,उसके अलावा कोई उपचार आमजन को उपलब्ध नहीं हो पाता है।पीएचसी की मूल स्वास्थ्य सेवाये प्रभावित हो रही है।
जांच और दवा व्यवस्था भी “जुगाड़” पर
शनिवार को फार्मासिस्ट और लेब टेक्नीशियन की अनुपस्थिति के कारण दवा वितरण और जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
लेब असिस्टेंट ही बीपी, शुगर जैसी सामान्य जांचें कर रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि अस्पताल की सेवाएं स्थायी सिस्टम के बजाय अस्थायी व्यवस्था पर चल रही हैं।
16 साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल: डिलीवरी क्यों नहीं?
2016 में उद्घाटन के बाद से आज तक इस पीएचसी में एक भी प्रसव नहीं कराया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में भवन और संसाधन तो हैं, लेकिन विशेषज्ञ स्टाफ की कमी के कारण मातृत्व सेवाएं आज भी शुरू नहीं हो पाई हैं।गर्भवती महिलाओं को आज भी प्रसव के लिए शाहपुरा या गुलाबपुरा रेफर करना पड़ता है, जिससे कई बार समय और दूरी दोनों संकट बन जाते हैं।आज से पहले जो भी डॉक्टर लगाया गया उसे अन्यत्र किसी अस्पताल की जिम्मेदारी भी दी गई जिससे नियमित अस्पताल नहीं रुक सके।
“रेफरल सेंटर” बनकर रह गया पीएचसी..
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि पीएचसी अब वास्तविक उपचार केंद्र नहीं बल्कि रेफरल सेंटर बनकर रह गई है। मरीज आते हैं, प्राथमिक उपचार होता है और फिर दूसरे अस्पताल भेज दिए जाते हैं।ग्रामीणों ने मांग की है कि पीएचसी में स्थायी डॉक्टरों की तैनाती की जाए, सभी रिक्त पद तुरंत भरे जाएं और सबसे महत्वपूर्ण प्रसव सेवा तत्काल शुरू की जाए, ताकि क्षेत्र की महिलाओं को सुरक्षित और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।ग्रामीणों का कहना है कि शाहपुरा और फुलिया कलां क्षेत्र का सबसे बड़ी गांव कहे जाने वाले खामोर गांव में किसी प्रकार की एंबुलेंस नहीं है।गांव में दो पत्थरों की लीज है रात दिन डंपर और बड़े वाहन दौड़ते हैं आए दिन यहां छोटी मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं और जिला अस्पताल की दूरी शाहपुरा 22 किमी पड़ता है वहीं गुलाबपुरा करीब 30 किमी पड़ता ह और फुलिया कलां भी 30 किमी पड़ता है सड़के भी खराब है दुर्घटना के समय निजी वाहन आसानी से अस्पताल नहीं जाते हैं आपात स्थिति में एंबुलेंस की आवश्यकता होती है जो शाहपुरा,गुलाबपुरा से आने में बहुत देरी हो जाती हैं इसलिए पीएचसी में एंबुलेंस की।आवश्यकता है।
आयुर्वेद डॉक्टर को 3 दिन के लिए पीएचसी खामोर लगा रखा।
खामोर पीएचसी पर 2 डॉक्टरों को सप्ताह में अलग अलग दिन के लिए अतिरिक्त चार्ज पर लगा रखा है।जानकारी के अनुसार शाहपुरा के आयुर्वेद डॉक्टर विनोद शर्मा को पीएचसी पर लगा रखा है जबकि आयुर्वेद विभाग ही अलग होता है पीएचसी में उस संबंधित कोई उपचार उपलब्ध नहीं है खामोर में आयुर्वेद अस्पताल ही अलग है फिर भी सप्ताह में 3 दिन डॉक्टर विनोद को पीएचसी लगाया हुआ है।इस संबंध में डॉक्टर विनोद से फोन पर बातचीत हुई जिसमें….
पत्रकार..डॉक्टर साहब आपकी हफ्ते में 3 दिन खामोर ड्यूटी है.
डॉक्टर.. हां सर
पत्रकार..सर आप तो आयुर्वेद में हो ना..
डॉक्टर.. हां सर
पत्रकार..तो आपको आयुर्वेद डॉक्टर को एलोपैथ में पीएचसी पर कैसे लगाया..
डॉक्टर..आप आगे बात करो..
पत्रकार..नहीं आपको लगा रखा है ना..
डॉक्टर.. हां तीन दिन में आता हूं 3 दिन दूसरे डॉक्टर साहब आते हैं..
पत्रकार..सर आपका तो डिपार्मेंट ही अलग है पूरा आयुर्वेद सिस्टम ही अलग है ना!
डॉक्टर..में वैसे एनएचएम RBS प्रॉजेक्ट के इसमें हूं इसलिए बीसीएमओ के अंडर चल रहे हैं..
आयुर्वेद हॉस्पिट में डॉक्टर नहीं ओर आयुर्वेद को एलोपैथ में अतिरिक्त चार्ज पर लगा रखा हैlखामोर के आयुर्वेदिक चिकित्सालय में स्थाई डॉक्टर नहीं हैं गोविंद गुर्जर को अतिरिक्त चार्ज पर 2 दिन के लिए लगा रखा है वहीं एनएचएम RBS प्रॉजेक्ट के तहत आने वाले आयुर्वेद डॉक्टर विनोद को एलोपैथ में पीएचसी पर लगा रखा है।
इनका कहना
डॉक्टरों की कमी होने से अतिरिक्त चार्ज पर लगा रखे हैं,हाल ही में कुछ दिनों पहले निरीक्षण करके गया था पूरा स्टाफ मौजूद था,लेब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट छुट्टी पर है..कोई समस्या है तो समाधान करेंगे।
ब्लॉक चिकित्साधिकारी चेनाराम कुमावत शाहपुरा