दिलखुश मोटीस
सावर(अजमेर)@स्मार्ट हलचल।सावर कस्बे में स्थित ऐतिहासिक गांवाई तालाब इन दिनों प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते बदहाली का शिकार बना हुआ है। नगर के मध्य स्थित यह विशालकाय तालाब कभी सावर की पहचान और जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत रहा है, लेकिन वर्षों से उचित देखरेख नहीं होने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
रियासती कालीन सावर सत्ताईसा की धरोहर माने जाने वाला यह तालाब गणगौरी चौक, ब्रह्म अखाड़ा, सब्जी मंडी, अंधेरिया बाग और निचला बास क्षेत्र तक फैला हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब छह वर्ष पूर्व तत्कालीन ग्राम पंचायत द्वारा तालाब की सफाई करवाई गई थी। उस दौरान उमरिया वाली आव, तीखी डूंगरी वाली आव तथा किले की तलहटी से आने वाले जल मार्गों को जेसीबी की सहायता से साफ किया गया था और तालाब के आसपास उगे विलायती बबूल सहित अन्य झाड़ियों को भी हटाया गया था।
इसके बाद से तालाब की नियमित देखरेख नहीं होने के कारण पुनः चारों ओर विलायती बबूलों का जाल फैल गया है। तालाब के घाट जर्जर हो चुके हैं तथा ऐतिहासिक जीरा सागर और महिलाओं की कुई भी उपेक्षा के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि लोग खुलेआम तालाब में कचरा डाल रहे हैं तथा मृत पशुओं को भी यहां फेंका जा रहा है। वहीं नगर की नालियों का गंदा पानी भी तालाब में पहुंचने से जल प्रदूषित हो रहा है और दुर्गंध फैलने लगी है। इससे तालाब की स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उपखंड मुख्यालय पर स्थित इस ऐतिहासिक जलाशय के संरक्षण और विकास के लिए अब तक न तो नगरपालिका प्रशासन ने कोई ठोस पहल की है और न ही जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता दिखाई है। ग्रामीणों ने विधायक शत्रुघ्न गौतम तथा जिला प्रशासन से विशेष बजट उपलब्ध करवाकर तालाब के सौंदर्यकरण, सफाई, अतिक्रमण एवं झाड़ियों की सफाई तथा जल आवक मार्गों के पुनरुद्धार की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही तालाब की सफाई और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वर्षा जल की आवक के रास्ते पुनः अवरुद्ध हो जाएंगे, जिससे क्षेत्र की जल संरक्षण व्यवस्था पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
