अनिल कुमार
स्मार्ट हलचल|ब्यावर राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की “सजगता” एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जवाजा पंचायत समिति क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मालीपुरा में मिड डे मील के दौरान ऐसा हादसा हुआ, जिसने सरकारी स्कूलों की असल हकीकत उजागर कर दी। विद्यालय परिसर में मौजूद करीब 25 वर्ष पुराने पानी के हौद पर बैठकर बच्चे पोषाहार ग्रहण कर रहे थे—शायद विभाग को यही व्यवस्था सबसे सुरक्षित लगी—लेकिन अचानक हौद की पट्टी टूट गई और बच्चों की जान जोखिम में पड़ गई।
हादसे में सूरज पुत्र मदन सिंह, कार्तिक पुत्र अशोक माली, मोबिन पुत्र सलीम खान सहित कुल पांच छात्र घायल हो गए, जबकि दो अन्य छात्रों को भी चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल तीन बच्चों को तुरंत ब्यावर स्थित अमृतकोर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। विडंबना यह है कि करीब 350 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में वर्षों से जर्जर भवन और पुराने निर्माण विभाग की “नजरों” में होने के बावजूद सुरक्षित बने हुए थे। जिला मुख्यालय से मात्र 6 किलोमीटर दूर स्थित इस स्कूल तक जिम्मेदारों की नजर न पहुंच पाना भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
हादसे के बाद शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रशासन की संवेदनशीलता भी देखने लायक रही। स्कूल के प्रिंसिपल विमल कुमार से जब घटना को लेकर जानकारी लेनी चाही गई तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया—शायद सवालों से ज्यादा चुप्पी को ही समाधान मान लिया गया। सरकार और विभाग की यह चुप्पी अब अभिभावकों और ग्रामीणों के आक्रोश में बदल चुकी है।
स्थानीय ग्रामीण चश्मीतगवा भेरू सिंह रावत ने बताया कि विद्यालय में जर्जर हौद और पुराने निर्माण को लेकर कई बार जिम्मेदार विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी अनदेखी ही नसीब हुई। अब जब बच्चे घायल हो गए हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगी?
यह घटना सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। सवाल आज भी वही है—इस हादसे का जिम्मेदार कौन है, और आखिर कब सरकार बच्चों की सुरक्षा को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारेगी?













