ओम जैन
शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|सेन्थी स्थित शांति भवन मे जैन सिद्धान्ताचार्य श्री प्रतिभा श्री जी म.सा. आदि ठाणा 4 का आध्यात्मिक चातुर्मास गतिमान है।प्रवक्ता रोशनलाल चोपड़ा ने बताया कि रविवार को स्पष्ट वक्ता साध्वी श्री प्रेक्षा श्री जी म.सा. ने फरमाया कि मानव कर्मो के आवरण से दबा हुआ होने से अपूर्ण है। जैसे एक पैर वाले व्यक्ति को बैसाखी की आवश्यकता होती है उसी प्रकार सांसारिक जीवन मे आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए सहारे की आवश्यकता होती है। समाज मे रहते हुए व्यक्ति को सहारा तो मिल जाता है किन्तु व्यक्ति एक सीमा तक ही कामयाब हो पाता है, क्योंकि यह सहारे अपूर्ण है। यह मानव मन की दुर्बलता है कि वह हर किसी को सहारा समझ बैठता है। वह हर किसी के सामने अपनी समस्या का बखान कर देता है, जबकि आपको पता है कि वह समाधान करने मे असमर्थ है। मनुष्य मनोबल की कमजोरी के कारण ऐसे सहारो को भी स्वीकार कर लेता है। कुछ सहारे ऐसे भी होते है जो कुछ हद तक कामयाब भी होते है किन्तु वे भी अपूर्ण ही है क्योंकि उनके भीतर राग द्वेष आदि छिपे रहते है। यह सहारे स्वार्थ सिद्धि तक ही सीमित है। निकटतम सम्बन्धी भी बिना स्वार्थ के सहारा नही बनते है।
चातुर्मासिक अनवरत जाप की श्रृंखला मे 31 अगस्त सोमवार का जाप जोघसिंह मारू की तरफ से रखा गया है अधिकाधिक संख्या मे पधारकर धर्म आराधना कर कर्म निर्जरा करने का आव्हान किया।
बाहर से आये अतिथियों का श्रीसंघ सेन्थी ने अभिनन्दन किया।
