हर महीने ब्लैक डे, फिर भी नहीं सुनवाई; 29 मई को फिर गरजेगा जनआंदोलन..
12वां स्मरणपत्र सौंप सरकार को याद दिलाएंगे ‘जिला वापस दो’ का वादा..
शाहपुरा@(किशन वैष्णव)शाहपुरा को पुनः जिले का दर्जा दिलाने की मांग अब केवल आंदोलन नहीं, बल्कि जनभावनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता की लड़ाई बन चुकी है। 28 दिसंबर 2024 को शाहपुरा जिले का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद से शुरू हुआ संघर्ष अब 516वें दिन में पहुंच गया है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने से जनता में भारी नाराजगी और रोष बना हुआ है। शाहपुरा जिला बहाल करो संघर्ष समिति ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए 29 मई शुक्रवार को मुख्यमंत्री के नाम 12वां स्मरणपत्र उपखंड अधिकारी शाहपुरा को सौंपने की घोषणा की है।
संघर्ष समिति के महासचिव एडवोकेट कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि जिले का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद से ही शाहपुरा की जनता लगातार लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रही है। प्रतिमाह की 28 तारीख को “ब्लैक डे” मनाकर सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध जताया जाता है। इस बार 28 मई को बकरी ईद का राजकीय अवकाश होने के कारण कार्यक्रम 29 मई को रखा गया है।
उन्होंने बताया कि संघर्ष समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा एवं संयोजक रामप्रसाद जाट के नेतृत्व में शुक्रवार सुबह 10:15 बजे उपखंड कार्यालय शाहपुरा के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन, नारेबाजी और विरोध सभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम 12वां स्मरणपत्र उपखंड अधिकारी को सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार को शाहपुरा को पुनः जिला बनाने का पूर्व में किया गया आश्वासन याद दिलाया जाएगा।
संघर्ष समिति का कहना है कि करीब एक वर्ष पूर्व जयपुर में मुख्यमंत्री के साथ शाहपुरा विधायक की मौजूदगी में वार्ता हुई थी। उस दौरान सरकार की ओर से शाहपुरा को फिर जिला बनाने का सकारात्मक भरोसा दिया गया था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई। इससे क्षेत्रवासियों में यह संदेश जा रहा है कि सरकार शाहपुरा की जनता की भावनाओं को गंभीरता से नहीं ले रही।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि शाहपुरा को जिला बनाए जाने के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार हुआ था। लोगों को सरकारी कार्यों के लिए राहत मिली थी और विभिन्न विभागों के कार्य स्थानीय स्तर पर होने लगे थे। लेकिन जिला समाप्त होने के बाद आमजन को फिर से दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों को समय और धन दोनों की अतिरिक्त मार झेलनी पड़ रही है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सरकार ने शाहपुरा की जनता के विश्वास को तोड़ा है। पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन, ब्लैक डे और शांतिपूर्ण आंदोलन किए जा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। समिति का कहना है कि शाहपुरा जिले की बहाली केवल प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के सम्मान, पहचान और विकास का सवाल है।
समिति पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आने वाले समय में बड़ा जनआंदोलन खड़ा कर सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाई जाएगी। संघर्ष समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आंदोलन को मजबूती देने की अपील की है।
