छात्रा से 300 उठक-बैठक लगवाने का आरोप, तबीयत बिगड़ी तो भी नहीं ली सुध! प्रधानाचार्य की कार्यशैली पर उठे सवाल

कक्षा 10वीं की बालिका को मिली कथित सजा, परिजनों ने जिला शिक्षा अधिकारी से की शिकायत; अन्य छात्राओं को भी प्रताड़ित करने के आरोप

जहाजपुर अलकेश पारीक

जहाजपुर।स्मार्ट हलचल|शिक्षा के मंदिर में बच्चों को अनुशासन और संस्कारों का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी जिन शिक्षकों पर है, उन्हीं पर यदि मासूम छात्राओं को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगें तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जहाजपुर के महात्मा गांधी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से सामने आया है। यहां कक्षा 10वीं में अध्ययनरत एक छात्रा से कथित तौर पर 200 से 300 उठक-बैठक लगवाने का आरोप प्रधानाचार्य पर लगा है।

परिजनों की ओर से 31 अक्टूबर को जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई शिकायत के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को कक्षा 10वीं की छात्रा ज्योति कुमारी से प्रधानाचार्य ने 200 से अधिक, करीब 300 उठक-बैठक लगवाईं। आरोप है कि इसके बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। शिकायत में बताया गया कि छात्रा को तेज बुखार आया, पूरा शरीर कांपने लगा और उसकी हालत खराब हो गई। इसके बावजूद विद्यालय स्तर पर उसकी सुध नहीं लेने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानाचार्य का छात्राओं के प्रति व्यवहार पहले से ही ठीक नहीं है। छात्रा के साथ कथित घटना के अलावा अन्य एक दर्जन से अधिक बालिकाओं से भी उठक-बैठक लगवाने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, डराने-धमकाने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में यह भी बताया गया कि कई बालिकाएं दूर-दराज के गांवों से पैदल विद्यालय आती हैं, ऐसे में इस तरह की सजा उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकती है।

शिकायत पहुंची अधिकारियों तक, अब जांच का इंतजार

परिजनों ने मामले को गंभीर बताते हुए शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच करवाने और प्रधानाचार्य के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा किशोर न्याय अधिनियम का भी उल्लेख किया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालय में छात्राओं के साथ ऐसा व्यवहार किस आधार पर किया जा रहा है? क्या बच्चों को अनुशासन सिखाने के नाम पर शारीरिक दंड देना उचित है? क्या शिक्षा विभाग इस शिकायत को गंभीरता से लेकर विद्यालय में अध्ययनरत अन्य छात्राओं से भी वास्तविक स्थिति की जानकारी लेगा?

अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग जांच कर छात्राओं को न्याय दिलाता है या फिर यह शिकायत भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती है।