ओम जैन
शंभूपुरा। स्मार्ट हलचल|सेंथी स्थित शांति भवन मे चातुर्मासिक प्रवचन जैन सिद्धान्तचार्य श्री प्रतिभाश्री जी म. सा. के तत्वाधान मे गतिमान है।प्रवक्ता रोशन लाल चोपड़ा के अनुसार साध्वी जी ने अपने प्रवचन मे फरमाया कि भारतीय संस्कृति प्रकाश की पुजारी है। भौतिक जगत मे प्रकाश का साधन मनुष्यो के लिए दीपक है। सूर्य व चन्द्र भी प्रकाश के प्रतिमान दिखते है। दीपक सीमीत क्षेत्र को प्रकाशित करता है किन्तु सूर्य व चन्द्र समस्त ब्रह्माण्ड को आलौकित करते है। पूर्व से पश्चिम तक यात्रा करता हुआ ज्योतिपुंज सूर्य समस्त संसार को प्रकाशवान करता है। गायत्री मंत्र मे सूर्य उपासना के द्वारा सूर्य किरणो से स्वयं को आलौकित करने का मार्ग दिखाया है।
कई श्रद्धालू प्रातः उगते सूर्य को नमस्कार करते है। सूर्य महा तेजस्वी प्रत्यक्ष देव है जो नित्य दर्शन देता है। सूर्य नमस्कार से तन मन व बुद्धि की जड़ता दूर होती है। व जीवन मे सक्रियता का संचार होता है। जैन दर्शनानुसार सूरज मे प्रकाश की गति एक सैकेण्ड मे एक लाख छियासी हजार मील है तो चैतन्य सूर्य की गति कितनी तीव्र हो सकती है। चैतन्य सूर्य की किरणे जब परमात्मा की ज्ञान किरणो से जुड़ती है तब कई अद्भूत कार्य होने लगते है।
निरन्तर नवकार मंत्र जाप की श्रृंखला मे 2 सितम्बर का जाप प्रकाश चन्द्र, गौरव दरड़ा की तरफ से रखा गया जिसमे अधिकाधिक संख्या मे पधारकर धर्म लाभ लेने का श्रीसंघ सेन्थी ने आव्हान किया।
