भारत ने एआरएफ व ईएएस समिट में आतंकवाद, सप्लाई चेन का उठाया मुद्दा

शाश्वत तिवारी

मनीला। स्मार्ट हलचल|फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 33वीं आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) मंत्री-स्तरीय बैठक और 21वें ईस्ट एशिया समिट (ईएएस) में भाग लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को मजबूती से साझा किया। आसियान ढांचे के तहत आयोजित इन उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
विदेश मंत्री द्वारा ‘एक्स’ पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, एआरएफ को संबोधित करते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दुनिया के सामने बढ़ रही भू-राजनीतिक जटिलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह जीरो टॉलरेंस (शून्य सहिष्णुता) होनी चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि आतंकवादी कृत्यों के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
उन्होंने आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले वित्तीय संसाधनों के रास्ते बंद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने वाले ‘मनीला प्लान ऑफ एक्शन’ का स्वागत किया और कहा कि इसके पांचों स्तंभ हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत के अपने दृष्टिकोण के पूरी तरह अनुकूल हैं। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत के प्रयासों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के गठबंधन (सीडीआरआई) को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।
इसके अलावा ईस्ट एशिया समिट में डॉ. जयशंकर ने वैश्विक अनिश्चितता की ओर से ध्यान दिलाते हुए कहा नई क्षमताओं, संपर्क और रिश्तों की वजह से संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं, राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दक्षता पर हावी हो रहे हैं, जबकि जोखिम लेने और सीमाओं को चुनौती देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने आगाह किया कि इस अशांत दौर में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
मंत्री ने वैश्विक नेताओं से कहा कि वर्तमान अस्थिरता और व्यवधान के दौर में, ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता। डॉ. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करने को बेहद अनिवार्य बताया और याद दिलाया कि वर्ष 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक समयोचित कदम है।
मनीला में 22-23 जुलाई को हुए विभिन्न सम्मेलनों के इतर डॉ. जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता चरम पर रही, जिसमें मुख्य तौर पर क्वाड देशों के अपने समकक्षों के साथ बातचीत, चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ संबंधों को बेहतर बनाने, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के समक्ष ब्लैक सी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताना और आसियान देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करना शामिल है।