सावर में गरजा प्रशासन का बुलडोजर! 120 प्लॉटों की अवैध कॉलोनी मलबे में तब्दील, करोड़ों के खेल पर उठे बड़े सवाल

तहसील के नाक के नीचे कट गई पूरी कॉलोनी, नगरपालिका की जमीन पर चला करोड़ों का खेल, गरीबों की जिंदगी भर की कमाई फंसी, अब जिम्मेदार कौन

दिलखुश मोटीस

सावर(अजमेर)@स्मार्ट हलचल।सावर नगरपालिका क्षेत्र में सोमवार का दिन उस समय सुर्खियों में आ गया जब चौसला कॉलोनी के पास विकसित की जा रही एक कथित अवैध कॉलोनी पर प्रशासन का पीला पंजा गरज उठा। चार जेसीबी मशीनों की गर्जना के बीच देखते ही देखते करीब 120 प्लॉटों के लिए बनाई गई चारदीवारी धूल के गुबार में बदल गई। भारी पुलिस जाप्ते की मौजूदगी में चली इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी और मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने जहां अवैध कब्जाधारियों और प्लॉटिंग करने वालों में हड़कंप मचा दिया, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये के इस पूरे खेल को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। लोगों की जुबान पर एक ही चर्चा है कि आखिर इतनी बड़ी कॉलोनी प्रशासन और तहसील कार्यालय की आंखों के सामने कैसे विकसित हो गई
नगरपालिका की जमीन पर 120 प्लॉट, करोड़ों का कारोबार और अब मलबा
स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भूमि पर कॉलोनी विकसित की जा रही थी, वह नगरपालिका की भूमि बताई जा रही है। आरोप है कि इसी भूमि पर करीब 120 प्लॉट काटे गए और धीरे-धीरे लोगों को बेचे गए। क्षेत्र में चर्चा है कि प्रत्येक प्लॉट की कीमत 5 से 6 लाख रुपये तक वसूली गई। यदि इन आंकड़ों को आधार माना जाए तो यह पूरा खेल 7 करोड़ रुपये से अधिक का बैठता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन पर पहले चारदीवारी बनाई गई, फिर प्लॉटिंग हुई और बाद में भूखंडों की खरीद-फरोख्त शुरू हुई। कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर यहां प्लॉट खरीदे। कुछ लोगों ने कर्ज लेकर और जेवर गिरवी रखकर भी भूखंड लिए, ताकि भविष्य में अपना खुद का आशियाना बना सकें।
हालांकि स्थानीय स्तर पर यह जानकारी भी सामने आई है कि जिस चारदीवारी को प्रशासन ने ध्वस्त किया, उसका निर्माण कथित रूप से भूमि खरीदने वाले व्यक्ति द्वारा कराया गया था। लेकिन सवाल यह है कि यदि जमीन नगरपालिका की थी तो वहां इस प्रकार की गतिविधियां आखिर कैसे संचालित होती रहीं?
सोमवार को जब बुलडोजर चला तो उन लोगों के सपने भी मलबे में तब्दील होते नजर आए जिन्होंने इस जमीन पर अपने भविष्य की नींव रखने का सपना देखा था।

सबसे बड़ा सवाल—जब कॉलोनी कट रही थी तब प्रशासन कहां था

कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि कॉलोनी अवैध थी तो इसे बनने क्यों दिया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि एक-दो दिन में 120 प्लॉटों की कॉलोनी तैयार नहीं होती। महीनों तक चारदीवारी, रास्तों और प्लॉटिंग का काम चलता रहा। ऐसे में क्या किसी अधिकारी की नजर वहां नहीं पड़ी? क्या किसी विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर जानकारी होने के बावजूद आंखें मूंद ली गईं
क्षेत्र में अब खुलेआम चर्चा है कि इतने बड़े खेल के पीछे आखिर किसका संरक्षण था। लोगों का मानना है कि बिना किसी प्रभावशाली संरक्षण के इतनी बड़ी प्लॉटिंग संभव नहीं हो सकती।

गरीबों की पूंजी का जिम्मेदार कौन

कार्रवाई के बाद सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों की है जिन्होंने प्लॉट खरीदने में अपनी मेहनत की कमाई लगा दी।
एक ग्रामीण ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी गरीब परिवार ने लाखों रुपये देकर प्लॉट खरीदा है और अब वह जमीन विवादों में घिर गई है, तो उसकी रकम कौन लौटाएगा प्रशासन, प्लॉट बेचने वाले या फिर कोई और
लोगों का कहना है कि कार्रवाई करना जरूरी है, लेकिन उन लोगों के साथ न्याय भी होना चाहिए जो कथित तौर पर गुमराह होकर इस कॉलोनी में प्लॉट खरीद बैठे।

पांच थानों का जाप्ता, छावनी में बदला इलाका

कार्रवाई को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। मौके पर केकड़ी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मील, केकड़ी पुलिस उपाधीक्षक हर्षित शर्मा, सावर तहसीलदार भगवती प्रसाद वैष्णव, सावर थानाधिकारी राधेश्याम चौधरी सहित पांच थानों का भारी पुलिस जाप्ता तैनात रहा।
चार जेसीबी मशीनों की मदद से घंटों तक कार्रवाई चलती रही। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण किसी भी प्रकार का विरोध सामने नहीं आया और प्रशासन ने शांतिपूर्वक कार्रवाई को अंजाम दिया।

क्या यह सिर्फ शुरुआत है

ग्रामीणों का कहना है कि सावर नगरपालिका क्षेत्र में आज भी कई स्थानों पर अवैध प्लॉटिंग और अतिक्रमण की शिकायतें हैं। ऐसे में जनता अब केवल एक कॉलोनी पर कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है।
लोगों की मांग है कि यदि प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान शुरू किया है तो इसे पूरे नगरपालिका क्षेत्र में समान रूप से चलाया जाए और छोटे-बड़े सभी अतिक्रमणों पर कार्रवाई हो।

जनता पूछ रही—असली दोषियों पर कार्रवाई कब

सोमवार की कार्रवाई के बाद अब जनता की निगाहें अगले कदम पर टिकी हैं। लोग पूछ रहे हैं कि यदि नगरपालिका की भूमि पर प्लॉटिंग कर करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? क्या केवल दीवारें तोड़ देने से मामला खत्म हो जाएगा या फिर पूरे मामले की गहन जांच होगी?
सावर में फिलहाल एक ही सवाल गूंज रहा है—
“यदि जमीन नगरपालिका की थी तो उस पर प्लॉटिंग कैसे हुई, और यदि कार्रवाई सही है तो करोड़ों रुपये के इस खेल के असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी”