सद्गुरु कबीर चरितम कथा के समापन पर उमड़ा जनसैलाब
आचार्य पंत श्री हुजूर अर्धनाम साहेब के सानिध्य में आनंदी चौका आरती; महाप्रसादी में दिया भोजन व्यर्थ न छोड़ने का संदेश
उदयपुर।स्मार्ट हलचल|सुहालका भवन में पिछले सात दिनों से चल रही सद्गुरु कबीर चरितम कथा का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ। काशी के कथाकार धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने मधुर वाणी और संगीतमय शैली में कथा का वाचन किया। अंतिम दिन बड़ी संख्या में कबीरपंथी श्रद्धालु पहुंचे। भीड़ के चलते कथा स्थल का पंडाल छोटा पड़ गया। आयोजक व्यवस्थाएं संभालने में जुटे रहे।
आचार्य पंत श्री हुजूर अर्धनाम साहेब के आगमन पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। फूलों से रंगोली बनाई गई और पुष्पवर्षा के साथ आरती की गई। हुजूर साहेब के पंडाल में पहुंचने पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। रामप्रसाद सुहालका, वालचंद सुहालका, भंवरलाल सुहालका, कैलाश प्रजापत और भगवती लाल चौधरी के परिवारों ने चरण वंदन कर दक्षिणा भेंट की। श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से दर्शन किए।
आनंदी चौका आरती में झूमे श्रद्धालु
आचार्य पंत श्री हुजूर अर्धनाम साहेब के करकमलों से आनंदी चौका आरती का आयोजन हुआ। इस दौरान महिलाओं ने भक्ति संगीत के साथ नृत्य-गान किया। कबीरपंथी पुरुष श्वेत वस्त्रों में और महिलाएं फागणिया परिधान में नजर आईं। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और स्वच्छता का ध्यान रखा गया।
भेरूलाल भोई और उनकी टीम ने महाप्रसादी की व्यवस्था संभाली। भोजन के दौरान “इतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में” का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने भोजन व्यर्थ न छोड़ने का संकल्प भी प्रदर्शित किया। आयोजकों ने कहा कि भोजन की बर्बादी रोककर जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने में योगदान दिया जा सकता है।
आयोजन ने भक्ति के साथ अहंकार, आडंबर और दिखावे से दूर रहने, स्वच्छता बनाए रखने तथा भोजन का सम्मान करने की सीख दी।