तेरापंथ धर्मसंघ के मुनि प्रसन्न कुमार जी की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन

 

तेरापंथ नगर से निकली बैकुंठी, श्रद्धा से उमड़ा श्रावक समाज

दशकों तक महकती रहेगी मुनि प्रसन्न कुमार जी की यश-सौरभ : मुनि यशवंत कुमार

भीलवाड़ा, 28 अप्रैल। स्मार्ट हलचल|तेरापंथ धर्मसंघ के वरिष्ठ संत, आचार्य महाश्रमण जी के सुशिष्य एवं तप, त्याग, अनुशासन और साधना की प्रतिमूर्ति मुनि प्रसन्न कुमार जी की पार्थिव देह मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गई। उनके देवलोकगमन से तेरापंथ धर्मसंघ सहित समस्त श्रावक-श्राविकाओं में शोक की लहर व्याप्त है।

सभाध्यक्ष जसराज चोरड़िया ने बताया कि मुनि प्रसन्न कुमार जी ने लगभग 24 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण कर 50 वर्षों तक संयम, साधना और त्यागमय जीवन जिया। उनका संपूर्ण जीवन अनुशासन, तपस्या, समर्पण और साधु मर्यादा का अनुपम उदाहरण रहा।

उन्होंने कन्याकुमारी से पंजाब तक देश के अनेक प्रांतों में पदयात्राएं कर धर्मप्रभावना, नैतिक जागरण और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य श्री तुलसी, आचार्य श्री महाप्रज्ञ एवं आचार्य श्री महाश्रमण जी की विशेष कृपा उन पर रही।

वे दृढ़ संकल्प के धनी संत थे, जिन्होंने शारीरिक कष्टों के बावजूद साधना का मार्ग कभी नहीं छोड़ा।

मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कोठारी ने बताया कि मंगलवार प्रातः 9 बजे तेरापंथ नगर से उनकी महाप्रयाण यात्रा श्रद्धाभाव से प्रारंभ हुई।

बैकुंठी यात्रा में भीलवाड़ा सहित समस्त मेवाड़ क्षेत्र से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

यात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई शास्त्रीनगर मोक्षधाम पहुंची, जहां अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन की गई।

इस अवसर पर मुनि यशवंत कुमार जी ने श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि मुनि प्रसन्न कुमार जी का यश, तप और साधना की सुगंध दशकों तक समाज को प्रेरित करती रहेगी।

महाप्रयाण यात्रा में सभाध्यक्ष जसराज चोरड़िया, निर्मल गोखरू, योगेश चंडालिया, दिलीप मेहता, अमिता बाबेल, अमित मेडतवाल, सपना कोठारी, अभिषेक कोठारी, गौतम दुगड़, शैलेन्द्र बोरदिया, अनिल सिंघवी, अनिल चोरड़िया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

समस्त वातावरण नम आंखों, शांत श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत रहा। मुनि प्रसन्न कुमार जी का प्रेरणादायी जीवन समाज के लिए सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।