अकरा। स्मार्ट हलचल|विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 6 से 10 अक्टूबर तक घाना, कोटे डी आइवर और इथियोपिया की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अफ्रीकी दौरे के पहले चरण में घाना की राजधानी अकरा पहुंचे विदेश मंत्री का उनके समकक्ष सैम ओकुद्ज़ेटो अब्लाक्वा ने गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में भारत और घाना के ऐतिहासिक संबंधों को एक नई दिशा देने और आपसी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए। ये समझौते दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग को कानूनी और संस्थागत ढांचा प्रदान करेंगे, जिससे व्यापारिक और तकनीकी क्षेत्रों में आदान-प्रदान और आसान हो जाएगा।
डॉ. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा घाना के विदेश मंत्री के साथ व्यापक बातचीत हुई। ‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदार के तौर पर, भारत-घाना दोनों की विकास से जुड़ी उम्मीदें और ऐतिहासिक एकजुटता एक जैसी है। व्यापार, निवेश, विकास, फार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में हमारी व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने और अफ़्रीकी यूनियन व इकोवास के साथ भारत के जुड़ाव को और मज़बूत करने पर भी बात हुई।
भारतीय विदेश मंत्री ने अपनी एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘‘हमारे ‘साउथ-साउथ सहयोग’ को आगे बढ़ाते हुए एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। एकेडमिक्स, वैज्ञानिक रिसर्च और क्षमता निर्माण में सहयोग के लिए ‘ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया’ और ‘घाना यूनिवर्सिटी’ के बीच एमओयू साइन हुए। इसके अलावा कृषि रिसर्च और शिक्षा में सहयोग के लिए ‘इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च, नई दिल्ली’ और ‘सीएसआईआर-क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट, घाना’ के बीच एमओयू हुआ।
डॉ. जयशंकर ने घाना में इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (आईटीईसी) प्रोग्राम के पूर्व छात्रों से बातचीत की। इस मुलाकात पर उन्होंने कहा कि क्षमता विकास और कौशल को बेहतर बनाना भारत-घाना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग का एक अहम हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री ने अकरा में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की।
जयशंकर ने यहां फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट में भारत, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ पर एक विशेष सभा को भी संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज के उथल-पुथल भरे दौर में कूटनीति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विभिन्न देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को टकराव में बदले बिना कैसे संभाला जाए। साथ ही, उन्होंने हितों के अलग होने के बावजूद आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से मुलाकात की और पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद भारत-घाना साझेदारी में आई तेज़ी के बारे में बात की और अलग-अलग क्षेत्रों में ‘व्यापक साझेदारी’ को और गहरा बनाने पर जोर दिया।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)