मौत के बाद भी धड़कता रहेगा दिल, रोशन होंगी आंखें… खामोर के वैष्णव परिवार के 7 सदस्यों ने लिया अंगदान का संकल्प

एएनएम पूजा की प्रेरणा से परिवार ने उठाया कदम, पत्रकार किशन वैष्णव ने हार्ट समेत उपयोगी अंगदान की जताई इच्छा

किशन वैष्णव

खामोर, स्मार्ट हलचल। जीवन भर परिवार और समाज के लिए योगदान देने वाले लोग बहुत होते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उम्मीद बनकर जीवित रहने का संकल्प विरले ही लोग लेते हैं। खामोर के वैष्णव समाज के एक परिवार के सात सदस्यों ने अंगदान का संकल्प लेकर मानव सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है।

खामोर निवासी कारसेवक एवं आयुर्वेद विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी मुरली मनोहर वैष्णव के परिवार के सात सदस्यों ने मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लिया है। परिवार की सदस्य एवं स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत पूजा देवी वैष्णव की प्रेरणा से सुभाष चंद्र वैष्णव, उनकी पत्नी अनीता देवी वैष्णव, पूजा देवी, उनके पति शिव कुमार वैष्णव, सरिता देवी एवं उनके पति दुर्गालाल वैष्णव तथा पत्रकार किशन वैष्णव ने अंगदान के लिए संकल्प लिया।

सुभाष चंद्र-अनीता और सरिता-दुर्गालाल सहित परिवार के सदस्यों ने ऑर्गन डोनेशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमाणपत्रों में विशेष रूप से कॉर्निया यानी नेत्रदान की सहमति दर्ज है। वहीं पत्रकार किशन वैष्णव ने हार्ट समेत अपने उपयोगी अंगों को मृत्यु के बाद दान करने की इच्छा जताई है।

परिवार का मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन यदि शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सके और किसी की जिंदगी में रोशनी या नई उम्मीद ला सके तो इससे बड़ी मानव सेवा कोई नहीं हो सकती।

एएनएम पूजा की प्रेरणा से शुरू हुई पहल

परिवार की इस पहल को आगे बढ़ाने में स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के रूप में कार्यरत पूजा वैष्णव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने स्वयं अंगदान का संकल्प लेकर परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार स्वास्थ्य सेवा केवल नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी इससे जुड़ा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अंगदान को लेकर जागरूकता की जरूरत है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी पूजा वैष्णव का स्वयं आगे आना और परिवार को प्रेरित करना अन्य लोगों के लिए भी जागरूकता का संदेश है।

पत्रकार किशन ने हार्ट समेत अंगदान की इच्छा जताई

परिवार के सबसे छोटे बेटे और पत्रकार किशन वैष्णव ने हार्ट समेत अपने उपयोगी अंगों को मृत्यु के बाद दान करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि अंगदान केवल खबर लिखने का विषय नहीं, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करने का विषय भी है। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर को पंचतत्व में विलीन होना है, ऐसे में उसके किसी उपयोगी हिस्से से किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन या रोशनी मिल सके तो इससे बेहतर सामाजिक योगदान नहीं हो सकता।

एक परिवार ने तोड़ी झिझक

अंगदान को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां और झिझक देखने को मिलती है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अंगदान की प्रक्रिया और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते। ऐसे में एक ही परिवार के सात सदस्यों का संकल्प अंगदान के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश देता है।

वैष्णव परिवार की यह पहल किसी बड़े आयोजन से नहीं, बल्कि परिवार के भीतर से शुरू हुई। एक सदस्य के संकल्प के बाद दूसरे सदस्यों ने भी कदम बढ़ाया और देखते ही देखते यह परिवार की साझा सोच बन गई।

मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का संदेश

अंगदान का संकल्प इस सोच को सामने रखता है कि इंसान की जिंदगी खत्म हो सकती है, लेकिन उसकी सेवा की भावना आगे भी जीवित रह सकती है। किसी की आंखें किसी जरूरतमंद के लिए रोशनी की उम्मीद बन सकती हैं और अन्य उपयोगी अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगा सकते हैं।

खामोर के इस वैष्णव परिवार के सात सदस्यों का अंगदान संकल्प समाज के लिए एक संदेश है कि सही जानकारी और इच्छाशक्ति के साथ मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का रास्ता चुना जा सकता है।