बोर्ड पर डॉक्टर, इलाज कोई और! कार्रवाई के अभाव में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
लखीमपुर खीरी।स्मार्ट हलचल|रामापुर क्षेत्र में मानकविहीन एवं कथित रूप से अवैध अस्पतालों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई ऐसे अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते, फिर भी उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। आरोपों के चलते स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।स्थानीय लोगों के अनुसार रामापुर से अमृतागंज रोड तक कई स्थानों पर कथित रूप से बिना आवश्यक मानकों वाले अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। आरोप है कि अंशुम क्लिनिक की आड़ में बेसमेंट में भी एक कथित अवैध अस्पताल संचालित किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई अस्पतालों के बाहर बड़े-बड़े बोर्डों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम लिखे होते हैं, लेकिन इलाज कथित रूप से अन्य लोगों द्वारा किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और मानकों के पालन की बात करती है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक भी समय-समय पर मानकविहीन अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी करते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन निर्देशों का अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है।
मामले को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत रामापुर क्षेत्र में पंजीकृत अस्पतालों की सूची भी मांगी गई थी। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते ऐसे अस्पतालों की जांच नहीं की गई तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को व्यापक अभियान चलाकर प्रत्येक अस्पताल की वैधता, पंजीकरण, चिकित्सकों की उपलब्धता और मानकों की जांच करनी चाहिए।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता का कहना है कि यदि किसी अस्पताल के संबंध में ठोस शिकायत और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराए जाते हैं, तो नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में वास्तव में मानकविहीन अस्पताल संचालित हो रहे हैं, तो अब तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह सवाल आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विभागीय जांच का इंतजार है।
