मुजमिल बबलू, मोहम्मद अली, मुस्तकीम, पप्पू, मंजूर अली समेत कई नाम चर्चा में; निघासन से गोला शिफ्ट हुआ प्रतिबंधित कारोबार होने का दावा, वन विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।
श्रीकान्त सिंह शाक्य
गोला गोकर्णनाथ खीरी।स्मार्ट हलचल|दक्षिण खीरी वन प्रभाग की गोला वन रेंज इन दिनों प्रतिबंधित वन उत्पाद कटरुआ (धरती का फूल) के कथित करोड़ों रुपये के कारोबार को लेकर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नगर की सब्जी मंडी में खुलेआम प्रतिबंधित कटरुआ की थोक और फुटकर खरीद-फरोख्त हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल खानापूर्ति करता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर की सब्जी मंडी में कथित रूप से मुजमिल बबलू, मोहम्मद अली, मुस्तकीम, पप्पू, मंजूर अली सहित कुछ अन्य लोग थोक स्तर पर कारोबार से जुड़े बताए जाते हैं। वहीं फुटकर बिक्री करने वालों में मेहरबान (अलीगंज), रिंकू (अलीगढ़), मुन्ना, इकबाल, प्रदीप राठौर समेत अन्य लोगों के नाम स्थानीय स्तर पर चर्चा में हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।
आरोप है कि बरसात शुरू होते ही गोला की सब्जी मंडी प्रतिबंधित कटरुआ से पट गई है। सुबह से देर शाम तक खरीदारों की भीड़ लगी रहती है और प्रतिदिन लाखों रुपये का कारोबार होने का दावा किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि खबरें प्रकाशित होने के बाद वन विभाग ने फुटकर विक्रेताओं के फड़ों पर तो छापेमारी की, लेकिन कथित बड़े थोक कारोबारियों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंची? आखिर छोटे दुकानदारों पर सख्ती और बड़े कारोबारियों पर नरमी किसके इशारे पर हो रही है?
सूत्रों का दावा है कि निघासन क्षेत्र में कार्रवाई के बाद कुछ बड़े व्यापारी अपना नेटवर्क गोला गोकर्णनाथ में ले आए हैं, जहां अब प्रतिदिन 18 से 20 लाख रुपये तक के प्रतिबंधित कटरुआ की खरीद-फरोख्त होने की चर्चा है।
सूत्र यह भी आरोप लगा रहे हैं कि नगर के कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह कारोबार चल रहा है और वन विभाग सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल वन संपदा की लूट नहीं, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।
जब इस संबंध में गोला वन रेंज के अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि वनकर्मी फिलहाल वृक्षारोपण अभियान में व्यस्त हैं। अभियान समाप्त होते ही विशेष अभियान चलाकर कटरुआ की बिक्री पूरी तरह बंद कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
उक्त सम्बन्ध मे जब डी एफ ओ दक्षिण को जब इस गोरखधंधे के फोटो वीडिओ उपलब्ध कराये गये और पूरी जानकारी दी गयी तो उन्होंने स्थान पूछकर चेक करवाने को कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया,अब इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन कार्यवाही करने से कतरा रहा है,आखिर क्यो? सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है।
उधर नगर के वन प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही छोटे-बड़े सभी कारोबारियों के खिलाफ समान रूप से निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो सदर चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वन विभाग वास्तव में करोड़ों के इस कथित अवैध कारोबार पर शिकंजा कसेगा, या फिर कार्रवाई केवल छोटे फड़ वालों तक ही सीमित रहेगी?
