नए अस्पतालों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, खजूरी सीएचसी में दरारें और ईटूंदा पीएचसी की उखड़ी टाइल्स पर विभाग सक्रिय

खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एनएचएम के सहायक अभियंता को भेजा पत्र, जनहानि की आशंका जताते हुए तत्काल जांच व मरम्मत के दिए निर्देश

अलकेश पारीक

जहाजपुर। स्मार्ट हलचल|करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए सरकारी स्वास्थ्य भवनों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खजूरी की नव निर्मित इमारत में पड़ी बड़ी-बड़ी दरारें तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ईटूंदा में उखड़ती फर्श की टाइल्स और खराब सौर ऊर्जा संयंत्र को लेकर चिकित्सा विभाग ने गंभीरता दिखाई है। खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जहाजपुर ने 17 जुलाई 2026 को सहायक अभियंता (सिविल), एनएचएम, भीलवाड़ा को पत्र भेजकर दोनों भवनों की तत्काल तकनीकी जांच एवं आवश्यक मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं।
बीसीएमओ द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि सीएचसी खजूरी की दीवारों में गंभीर दरारें आ चुकी हैं और बारिश का पानी भवन के भीतर टपक रहा है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भवन की यह स्थिति भविष्य में दीवार गिरने जैसी घटना को जन्म दे सकती है, जिससे जनहानि की आशंका बनी हुई है।
वहीं पीएचसी ईटूंदा के नव निर्मित भवन में कई स्थानों पर फर्श की टाइल्स उखड़ चुकी हैं और गड्ढे बन गए हैं। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कर्मचारियों के फिसलकर चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा अस्पताल में लगाया गया सौर ऊर्जा संयंत्र भी सुचारु रूप से कार्य नहीं कर रहा, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने दोनों संस्थानों की स्थिति को गंभीर मानते हुए आवश्यक तकनीकी परीक्षण, गुणवत्ता की जांच और शीघ्र मरम्मत के निर्देश दिए हैं। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भीलवाड़ा, अधिशासी अभियंता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अजमेर तथा संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अस्पताल यदि शुरूआती दौर में ही इस तरह की खामियां दिखाने लगें तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि केवल मरम्मत ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था में सुधार हो सके