वार्ड 10-11 बने गंदगी के तालाब, “स्विमिंग पूल” में डूबा विकास
*5 साल से नालियों की मांग, सरपंच-सचिव ने नहीं सुनी | महिलाएं कीचड़ में लेकर जा रहीं बच्चे, बीमारियों का खतरा*
गुरला:- स्मार्ट हलचल|एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार “स्वच्छ भारत मिशन” पर हजारों करोड़ खर्च करने का दावा कर रही है। दूसरी तरफ भीलवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत सेथुरिया के सोपुरा गांव के वार्ड 10 और 11 में इंसान की जिंदगी की कोई कीमत ही नहीं है। यहां 5 साल से नालियों की साफ-सफाई व नाली नहीं बनी। नतीजा – घर-घर से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बारिश में पूरा वार्ड तालाब बन जाता है। स्थानीय लोग तंज कसते हुए इसे सरकार का दिया हुआ स्विमिंग पूल”_ कहते हैं।
*जिंदगी और मौत के बीच रास्ता* हमारी टीम जब मौके पर पहुंची तो रूह कांप गई।
*”वोट ले लिए, अब मरने दो” – ग्रामीण* वार्डवासी फूट-फूट कर रो पड़े। *स्थानीय निवासी:* सचिव सरपंच को कही बार कह चुके। हर बार कहते हैं ‘अबकी बार नाली बन जाएगी’। 5 साल निकल गए। बारिश में घरों में सांप-बिच्छू घुस जाते हैं। सुबह होते ही घर से निकलते हीर इसी नाले जैसे पानी से होकर खेत पर अन्य काम के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है। पैरों में नालियों का गंदा पानी ओर घरों में। रात भर मच्छर काटते हैं। डेंगू हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का रुका हुआ गंदा पानी डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और पेट की बीमारियों की फैक्ट्री है। *कागजों में विकास, जमीन पर कीचड़* सबसे बड़ा सवाल: पंचायत को हर साल लाखों का फंड आता है। वो जाता कहां है? सोपुरा निवासी भेरू पुरी गोस्वामीने बताया की चुनाव में हाथ जोड़कर आए थे। बोले थे नाली और सड़क पक्की करेंगे। अब कॉल करो तो ज़वाब नहीं क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड 10-11 में विकास के नाम पर सिर्फ फाइलों में हस्ताक्षर हुए हैं।
