रात्रि गश्त पर कांस्टेबल की हत्या के आरोप में ट्रक (ट्रेलर) चालक जीजा-साला गिरफ्तार,शिकार के दौरान विवाद बना मौत की वजह-टोपीदार बंदूक से फायर कर हत्या
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|जिले के उनियारा सर्किल अंतर्गत बनेठा थाना क्षेत्र के ककोड़ इलाके में 2 मई शनिवार-रविवार मध्य रात्रि को रूपवास मोड़ के पास हुए कांस्टेबल भागचंद सैनी चर्चित हत्याकांड मामले में टोंक पुलिस की चार अलग-अलग गठित टीमों ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर पूरे मामले का खुलासा कर दिया।
*घटना और वारदात का पूरा घटनाक्रम*
जानकारी के अनुसार ककोड़ चौकी पर तैनात कांस्टेबल भागचंद सैनी 2 मई, शनिवार देर रात पुलिस चौकी ककोड से गश्त निकले थे। इसी दौरान गश्त करते हुए उनकी टोकाटोकी बाईक पर सवार दो युवकों से हुई, जो रात्रि में शिकार करने के उद्देश्य से इलाके में घूम रहे थे। कांस्टेबल द्वारा उनके पास बंदूक देखकर रोकते हुए पूछताछ करने पर दोनों पक्षों के बीच आपसी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने अपने पास रखी टोपीदार बंदूक से मारपीट कर नीचे गिराकर फायर कर दिया, जिससे कांस्टेबल भागचंद सैनी की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
*साक्ष्य मिटाने की कोशिश और फरारी*
हत्या के बाद दोनों आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने का प्रयास करते हुए सरकारी बाईक को लाश के पास ही पटक दिया और मृतक सिपाही का मोबाईल फोन भी छीनकर अपने साथ ले गए, ताकि पहचान और लोकेशन से बचा जा सके। घटना के बाद आरोपी पास के गांव मोटीस की झोपड़ियां में रातभर रुके और रविवार सुबह होते ही जयपुर जिले के चंदवाजी-शाहपुरा क्षेत्र की ओर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जिला पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा एफएसएल टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए टोंक के सआदत अस्पताल भिजवाया गया।
*परिजनों का आक्रोश और मांगें*
अस्पताल में मृतक के परिजन और समाज के लोग एकत्र हो गए, जिन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, 1 करोड़ से अधिक मुआवजा, सरकारी नौकरी और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने शुरूआत में बजरी माफियाओं पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की थी, करीब 5 घंटे तक चले गतिरोध के बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा समझाइश कर परिजनों से सहमति बनाई गई, जिसके बाद मामला शांत हुआ और पुलिस अधीक्षक ने तुरन्त चार टीमों का गठन कर 24 घंटे के अल्टिमेटम के साथ कार्यवाही शुरू की।
*पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी*
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा के निर्देशन में तुरंत ही चार विशेष टीमों का गठन किया गया। पुलिस की टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल ट्रैकिंग और बीटीएस लोकेशन के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने आरोपी राजेश मीणा के भाई के घर से टोपीदार बंदूक जप्त की तथा भाई की निशानदेही पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को चंदवाजी (जयपुर) क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेश मीणा निवासी मोटीस की झोपड़ियां (थाना उनियारा, टोंक) तथा दिलराज मीणा निवासी भट्टो का नया गांव (थाना नैनवां, जिला बूंदी) के रूप में हुई है। दोनों आरोपी ट्रक-ट्रेलर चालक हैं और रिश्ते में आपस के जीजा-साला हैं। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त टोपीदार बंदूक, छर्रे व बारूद, एक छुर्रा, स्पलेंडर बाईक आदि बरामद कर लिया है। मामले के खुलासे में जिला स्पेशल टीम सहित तकनीकी आधार पर साईबर सेल टीम के प्रभारी सुरेश चावला सहित उनकी टीम हैड कांस्टेबल राजेश गुर्जर 51, राजेश शर्मा 311 का विशेष योगदान रहा हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा आईपीएस के निर्देशन में सभी पुलिस अधिकारियों की गठित टीम के समन्वय से इस जघन्य अपराध का खुलासा महज 12 घंटे में किया है, जो सराहनीय हैं।
*पुलिस पर सवाल खड़े करती कार्यवाही-जिसका खुलासे में हवाला नहीं*
हालांकि, मामले के खुलासे के बाद कुछ सवाल भी खड़े हो रहे हैं—जैसे कि मृतक सिपाही का मोबाइल बरामद होने की जानकारी आधिकारिक तौर से सार्वजनिक नहीं करना और आरोपियों की गिरफ्तारी से जुड़े कुछ तथ्य स्पष्ट न होना। साथ ही आरोपियों के ट्रक चालक होने की जानकारी भी नहीं दी गई है, जबकि आरोपी ट्रक चलाते हुए चंदवाजी (जयपुर) से गिरफ्तार हुए हैं। वहीं पुलिस द्वारा वारदात में आरोपियों की रिमांड के दौरान हुई मारपीट में हाथ पैरों से वे लंगड़ाते पैरों पर चल रहे थें, जिसके आरोपियों के फोटो व वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं, जो एक तरह से मानवाधिकारों, मौलिक अधिकारों सहित जोधपुर हार्डकोर्ट के निर्णय के विपरीत हैं।
*कानूनी कार्रवाई और जांच*
मामले में मृतक के पिता पूर्व पार्षद कालूराम सैनी निवासी तुम्बीपुरा (थाना सदर टोंक) ने 3 मई को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने प्रकरण में धारा 103(1) और 238(ए) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की, थानाधिकारी बनेठा भागीरथ सिंह राजावत (पुलिस निरीक्षक) द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है। मामले में अन्य सह संभावित आरोपियों की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही हैं। पुलिस द्वारा मंगलवार को थाना बनेठा पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टोंक रतनलाल भार्गव, पुलिस उपाधीक्षक उनियारा आकांक्षा चौधरी सहित पुलिस टीम की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले का खुलासा किया है।
*क्षेत्र में चर्चा और पुलिस की बड़ी सफलता*
सोमवार को जैसे ही आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई, मृतक कांस्टेबल के परिजनों में आक्रोश फैल गया।परिजनों ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के साथ-साथ फांसी देने की मांग की है। यह मामला न केवल पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था। ऐसे में टोंक पुलिस द्वारा महज 12 घंटे में हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करना एक बड़ी और अहम सफलता माना जा रहा है।
*पुलिस को मिली बड़ी उपलब्धि*
फिर भी, बेहद कम समय महज 12 घंटे में इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करना टोंक पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजर अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
