75 वर्ष की उम्र में गोवा स्थित आवास पर ली अंतिम सांस, कार्डियक अरेस्ट की शुरुआती जानकारी; हिंदी-मराठी सिनेमा में शोक की लहर
राजेन्द्र खटीक
मुंबई।स्मार्ट हलचल|हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, लेखक और निर्देशक नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें गोवा स्थित उनके आवास पर अचेत अवस्था में पाया गया। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। अपनी दमदार आवाज, संवाद अदायगी, तीखे तेवर और सहज अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
रंगमंच से सिनेमा तक छोड़ी अमिट छाप
नाना पाटेकर ने अभिनय की शुरुआत रंगमंच से की और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी फिल्मों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। 1978 की फिल्म ‘गमन’ से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने अनेक यादगार भूमिकाएं निभाईं और अपनी अभिनय शैली के कारण दर्शकों के बीच अलग मुकाम बनाया।
उनका अभिनय केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों और गंभीर भूमिकाओं को पर्दे पर जिस तीव्रता के साथ उन्होंने प्रस्तुत किया, उसने उन्हें अपने दौर के विशिष्ट अभिनेताओं में शामिल किया।
किरदार निभाए नहीं, उन्हें जिया
नाना पाटेकर के अभिनय की सबसे बड़ी खासियत उनकी संवाद अदायगी और चेहरे के भाव माने जाते थे। वे पर्दे पर आते तो किरदार के भीतर उतर जाने का एहसास दर्शकों को होता था। गंभीर, आक्रामक, संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़े किरदारों में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी।
फिल्म ‘क्रांतिवीर’ से लेकर ‘परिंदा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनकी भूमिकाएं लंबे समय तक दर्शकों की स्मृति में रहीं।
अचानक निधन से सदमा
रिपोर्टों के मुताबिक नाना पाटेकर को गोवा स्थित आवास पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय प्रयास किए गए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। कुछ रिपोर्टों के अनुसार चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देने की कोशिश की। मामले में मेडिको-लीगल प्रक्रिया और पोस्टमार्टम की बात भी सामने आई है।
अभिनय की दुनिया में खाली हुई जगह
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने दशकों लंबे करियर में यह साबित किया कि अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं, बल्कि किरदार को महसूस करना और उसे दर्शकों तक उसी तीव्रता से पहुंचाना है।
उनकी आवाज, उनका अंदाज और पर्दे पर उनकी मौजूदगी लंबे समय तक सिनेमा प्रेमियों की यादों में जीवित रहेगी।
नाना पाटेकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।