आज का भारत वैश्विक चुनौतियों पर आत्मविश्वास से रख रहा रायः डॉ. जयशंकर

शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली।स्मार्ट हलचल|विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ के रूप में इंडियन काउंसिल ऑफ़ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) की सिल्वर जुबली (25वीं वर्षगांठ) के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने वैश्विक पटल पर भारत की तेजी से बदलती भूमिका, बढ़ती भागीदारी, वैश्विक रुचियों, जिम्मेदारियों और देश से दुनिया की बढ़ती उम्मीदों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज का भारत वैश्विक चुनौतियों पर कहीं अधिक आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ अपने दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रख रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अभूतपूर्व सफलता के लिए विदेश मंत्रालय की टीम की सराहना की। कार्यक्रम में विदेश सचिव विक्रम मिसरी सहित कई वरिष्ठ राजनयिक, प्रख्यात विद्वान और नीति निर्माता भी मौजूद रहे। इस आयोजन ने भारत की विदेश नीति के वैचारिक विकास में आईसीडब्ल्यूए के पिछले 25 वर्षों के शानदार योगदान और विकसित भारत 2047 के संकल्प में इसकी भावी भूमिका को एक नई ऊर्जा दी है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा आईसीडब्ल्यूए के ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ के तौर पर नामित होने के बाद आयोजित सिल्वर जुबली समारोह में शामिल होकर खुशी हुई। इस मौके पर आने और खास लोगों को संबोधित करने के लिए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद। जैसे-जैसे दुनिया बदल रही है, आज का भारत भी बदल रहा है।
विदेश मंत्री ने आगे बताया कि उन्होंने अपने संबोधन के दौरान विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज को मजबूत करने के लिए भारत द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक उभरते हुए भारत को वैश्विक मंच पर अपनी अनूठी नीतियों, इतिहास, अनुभवों और हितों को मुखरता से आगे बढ़ाना होगा। इसके साथ ही, जैसे-जैसे भारत की वैश्विक भूमिका का दायरा बढ़ रहा है, अंतरराष्ट्रीय मामलों में देश की बौद्धिक सक्रियता को भी उसी गति से विकसित होना होगा।
डॉ. जयशंकर ने एनर्जी के स्रोतों में विविधता लाने, नए बाज़ारों तक पहुंचने, एक्सपोर्ट बढ़ाने और विदेशों में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए भारत सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने यह भरोसा जताया कि आईसीडब्ल्यूए ‘विकसित भारत’ के लिए एक बेहतर और खास रणनीति बनाने के मकसद से चर्चा, बहस और बातचीत को बढ़ावा देता रहेगा।