टोंक: जानलेवा हमले में घायल शिक्षक की सालभर बाद मौत-अलीगढ़ थाना पुलिस की जांच पर उठे सवाल,

सिर में गंभीर चोट लगने से करीब एक साल से कोमा में थे शिक्षक श्योदास मीणा-जयपुर से जांच कराकर लौटते समय चाकसू के पास तोड़ा दम,

* दो फरार आरोपियों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम, हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला; मौत के बाद हत्या की धारा जुड़ने की संभावना

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/अलीगढ़। स्मार्ट हलचल|टोंक जिले के उनियारा सर्किल अन्तर्गत अलीगढ़ थाना क्षेत्र में जानलेवा हमले में गंभीर घायल राजकीय शिक्षक श्योदास मीणा की करीब 12 माह बाद मौत हो गई। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद वह लंबे समय से कोमा में थे। रविवार रात जयपुर से जांच करवाकर लौटते समय शिवदासपुरा टोल प्लाजा के पास चाकसू क्षेत्र में उन्होंने दम तोड़ दिया। शिक्षक की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों की सूचना पर अलीगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर उनियारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी में रखवाया। सोमवार सुबह मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
परिजनों के अनुसार, 3 अक्टूबर 2025 को शिक्षक श्योदास मीणा बराना गांव में स्कूल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर कुछ युवकों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। अगले दिन वह बराना गांव के श्मशान घाट के पास अर्द्धनग्न और गंभीर घायल अवस्था में मिले थे। उन्हें सवाई माधोपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से जयपुर रेफर किया गया था।
*एफआईआर दर्ज-जांच की शिथिलता पर सवाल*
मामले में अलीगढ़ थाने में एफआईआर संख्या 151/2025 दर्ज हुई थी। शिकायत में राकेश कुमार मीणा, विजेन्द्र मीणा, सांवलराम मीणा और धारासिंह मीणा के नाम सामने आए थे। पीड़ित पक्ष के अनुसार, पुलिस ने राकेश कुमार मीणा को गिरफ्तार किया, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की करीब एक साल बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। परिजनों ने तत्कालीन जांच अधिकारी एएसआई भंवरलाल मीणा की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विजेन्द्र मीणा का नाम जांच के दौरान प्रकरण से अलग कर दिया गया, जबकि परिवार उसे घटना में शामिल बता रहा है।
*दो आरोपियों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित*
पीड़ित पक्ष के अनुसार, सांवलराम मीणा और धारासिंह मीणा पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर परिवार ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
*हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला*
परिजनों के अनुसार, अधिवक्ता लाखन सिंह मीणा की पैरवी के बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पहुंचा। वर्तमान जांच अधिकारी एवं अलीगढ़ थानाधिकारी राजकुमार चौधरी को मेडिकल रिपोर्ट और जांच की प्रगति रिपोर्ट के साथ न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। पीड़ित पक्ष का कहना है कि शिक्षक की हालत बयान देने योग्य नहीं थी।
*मौत के बाद हत्या की धारा जुड़ने की संभावना*
शिक्षक श्योदास मीणा की मौत के बाद प्रकरण में अब हत्या से संबंधित धारा जोड़े जाने की संभावना है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और दर्ज धाराओं की पुष्टि होना बाकी है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय तथ्यों और जांच के आधार पर की जाएगी।
*निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग*
पीड़ित परिवार ने प्रकरण में अलीगढ़ थाने के तत्कालीन जांच अधिकारी एएसआई भंवरलाल मीणा, तत्कालीन थानाधिकारी पवन कुमार चौधरी और वर्तमान जांच अधिकारी पुलिस निरीक्षक राजकुमार चौधरी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें गवाही देने पर धमकियां भी मिल रही थीं। उन्होंने सुरक्षा उपलब्ध कराने और मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। शिक्षक की मौत के बाद अब पुलिस की आगे की कार्रवाई, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की दिशा पर नजर रहेगी। मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।