भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)
स्मार्ट हलचल|अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) में तबादला आदेशों की पालना को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। 10 जुलाई 2026 को निगम सचिव (प्रशासन) स्तर से जारी आदेश के एक माह बाद भी कई कार्मिकों को रिलीव नहीं किए जाने का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि ललित तोलंबिया (AO), साक्षी वालिया (JEN), वाशिम खान (CA-I), बालकृष्ण प्रजापत (JEN), जितेंद्र जोनवाल (JEN) और आयुष माथुर (JEN) को अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है। रिलीविंग के लिए पत्राचार के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं।
“ऊपर आदेश, नीचे अड़ंगा?”
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निगम के सचिव (प्रशासन) स्तर से तबादला आदेश जारी हो चुके हैं तो उनकी पालना स्थानीय स्तर पर क्यों अटकी हुई है? क्या निगम के आदेशों से ऊपर भी कोई व्यवस्था है?
वहीं, तबादलों पर रोक के बावजूद अधिशासी अभियंता, भीलवाड़ा रतन लाल वीरवाल द्वारा ग्रामीण द्वितीय क्षेत्र से जुड़े कार्मिकों के स्थानीय स्तर पर तबादले किए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
“नियम सबके लिए बराबर या अलग-अलग?”
एक तरफ उच्च स्तर के तबादला आदेशों की पालना नहीं होने का आरोप और दूसरी तरफ ट्रांसफर बैन के बीच स्थानीय आदेश—दोनों मामलों में निगम प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
अब सवाल यह है कि 10 जुलाई के आदेश के बाद किसे रिलीव किया गया, किसे रोका गया और क्यों? साथ ही रोक के दौरान जारी स्थानीय तबादला आदेशों के लिए सक्षम स्वीकृति ली गई थी या नहीं—इसकी जांच की जरूरत बताई जा रही है।
कार्मिकों के बीच चर्चा तेज है—“जब निगम के आदेश ही धरातल पर लागू नहीं होंगे, तो फिर नियमों की पालना किससे कराई जाएगी?”
