जयपुर में आदिवासी प्रगतिशील संगठन के सामुदायिक भवन में गूंजा राष्ट्रगान, धूमधाम से मनाया 80वां स्वाधीनता दिवस

जे.पी. मीना IAS (सेवानिवृत्त) ने किया ध्वजारोहण, आदिवासी समाज के अधिकार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक एकजुटता पर हुआ मंथन

✍️राकेश मीणा

जयपुर। स्मार्ट हलचल|देश की आजादी के 80वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर आदिवासी प्रगतिशील संगठन की ओर से सेक्टर-3, इंदिरा गांधी नगर, जगतपुरा, जयपुर स्थित संगठन के निर्माणाधीन सामुदायिक भवन परिसर में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। तिरंगे की शान में आयोजित समारोह में संगठन के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे कार्यक्रम में देशप्रेम के साथ आदिवासी समाज के उत्थान और भविष्य की दिशा को लेकर गंभीर चिंतन दिखाई दिया।

समारोह में संगठन के अध्यक्ष श्री जे.पी. मीना, IAS (सेवानिवृत्त) ने संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की उपस्थिति में विधिवत ध्वजारोहण किया। जैसे ही तिरंगा आसमान में लहराया, उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन कर देश की एकता, अखंडता और गौरव को नमन किया। कार्यक्रम स्थल देशभक्ति की भावना से सराबोर हो गया।

सामुदायिक भवन बनेगा समाज की नई ऊर्जा का केंद्र

स्वाधीनता दिवस समारोह के दौरान निर्माणाधीन सामुदायिक भवन को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि यह भवन केवल ईंट-पत्थरों से तैयार होने वाला ढांचा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सामाजिक एकजुटता, शिक्षा, संस्कृति, प्रतिभा और विकास का सशक्त केंद्र बनेगा।

भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यहां समाज के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और प्रतिभाओं के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करने की योजना पर विचार किया गया। सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम, शैक्षणिक मार्गदर्शन, सांस्कृतिक आयोजन, प्रतिभा सम्मान, युवाओं के लिए संवाद कार्यक्रम तथा समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता बताई गई।

सदस्यों ने कहा कि जयपुर जैसे महानगर में समाज के लिए एक ऐसा सामुदायिक केंद्र होना जरूरी है, जहां समाज के लोग एकत्रित होकर अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकें, नई पीढ़ी को दिशा दे सकें और सामाजिक विकास की योजनाओं को धरातल पर उतार सकें।

‘शिक्षा और संगठन ही विकास की सबसे मजबूत नींव’

कार्यक्रम में आदिवासी समाज की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि आज समय तेजी से बदल रहा है। ऐसे दौर में समाज को अपनी जड़ों, संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, तकनीक और आधुनिक अवसरों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना होगा।

शिक्षा को समाज की प्रगति की सबसे मजबूत नींव बताते हुए युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं में आगे आने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया। साथ ही समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता जताई गई।

अधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी

बैठक में आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और विकास से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि अधिकारों की जानकारी और उनके प्रति जागरूकता समाज को मजबूत बनाती है। इसके लिए गांव से लेकर शहर तक समाज के लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

सदस्यों ने कहा कि समाज के विकास की लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। हर शिक्षित युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिकारी, कर्मचारी और समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।

युवा शक्ति को आगे लाने पर जोर

कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। यदि युवाओं को सही दिशा, बेहतर शिक्षा और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

युवाओं को नशे और सामाजिक कुरीतियों से दूर रखते हुए शिक्षा, खेल, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया। साथ ही समाज की प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई।

महिलाओं की भागीदारी भी जरूरी

समारोह में महिलाओं की सामाजिक और शैक्षणिक भागीदारी को बढ़ाने पर भी विचार किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब संभव है, जब महिलाओं को शिक्षा, सम्मान, निर्णय प्रक्रिया और विकास के समान अवसर मिलें। समाज की बेटियों को उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत बताई गई।

स्वतंत्रता का अर्थ जिम्मेदारी भी

स्वाधीनता दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का दिन है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आजादी का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र मजबूत होगा तो समाज मजबूत होगा और समाज मजबूत होगा तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य मजबूत होगा।

एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आदिवासी समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। संगठन के निर्माणाधीन सामुदायिक भवन के कार्य को पूर्ण कराने और भविष्य में इसे समाजहित की गतिविधियों का प्रभावी केंद्र बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने पर सहमति बनी।

स्वाधीनता दिवस समारोह ने एक ओर जहां तिरंगे के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज की चुनौतियों, अधिकारों और भविष्य की दिशा को लेकर नई ऊर्जा और संकल्प का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम में यह भावना प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई कि शिक्षा, संगठन, जागरूकता और एकजुटता के माध्यम से ही आदिवासी समाज नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। 🇮🇳