बोले- दिखावे की नहीं, निष्काम भाव से की गई सेवा ही श्रेष्ठ
महेन्द्र नागौरी
भीलवाड़ा| स्मार्ट हलचल|माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चल रहे ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के दैनिक सत्संग में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी रामदयालजी महाराज ने नाम भक्ति की महिमा बताई।उन्होंने कहा कि “जीवन में जिसने नाम तत्व और उसके मर्म को जान लिया, उसकी भक्ति सार्थक हो जाती है।” राम नाम सुनना और लेना सौभाग्य है। भगवान की भक्ति में किसी बाहरी सहयोग की जरूरत नहीं, बल्कि अनन्य श्रद्धा और समर्पण जरूरी है।
आचार्यश्री ने कहा कि सेवा में भी दिखावा नहीं, निष्काम भाव होना चाहिए। संसार में विरले ही ऐसे लोग हैं, जो नाम और फोटो की चाह के बिना भक्ति व सेवा में जुटे रहते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन का लक्ष्य तय कर नाम साधना को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि संसार के काम कितने भी कर लिए जाएं, भगवान का भजन नहीं किया तो सब निष्फल है। व्यर्थ की चिंता छोड़कर नाम साधना में मन लगाना चाहिए।
इससे पूर्व संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। प्रवचन के बाद श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री की आरती की। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास के तहत रक्षा बंधन पर शुक्रवार सुबह 9 से 10 बजे तक विशेष प्रवचन होंगे।
