मूल फाइलें गायब, यूआईटी कर्मचारियों की भूमिका पर कांग्रेस ने उठाई अंगुली;
कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मांगी निष्पक्ष जांच
भीलवाड़ा, 26 अक्टूबर
स्मार्ट हलचल|शहर के पटेल नगर क्षेत्र में 492 भूखंडों से जुड़ा मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। करीब 200 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति से जुड़े इस प्रकरण में कथित बेनामी नामों से भूखंडों की प्रविष्टियां दर्ज होने और मूल फाइलें गायब मिलने से नगर विकास न्यास (यूआईटी) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में अब न्यास के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। प्रकरण को लेकर सोमवार को पीसीसी सदस्य मनोज पालीवाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यूआईटी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटेल नगर के 492 भूखंडों में कथित बेनामी नामों से जुड़ी प्रविष्टियों का मामला सामने आने के बाद यूआईटी ने संबंधित भूखंडों के निरस्तीकरण की कार्रवाई प्रक्रियाधीन होने की जानकारी दी है। दूसरी ओर, इन भूखंडों की प्रविष्टियां प्रॉपर्टी रजिस्टर में दर्ज होने के बावजूद उनकी मूल फाइलें उपलब्ध नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इतने बड़े भूखंड प्रकरण में मूल दस्तावेजों का गायब होना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल है, बल्कि इससे दस्तावेजों के संधारण और निगरानी की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ गई है।
पीसीसी सदस्य मनोज पालीवाल ने कहा कि 492 भूखंडों की मूल फाइलों का उपलब्ध नहीं होना सामान्य चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह पता लगाया जाना चाहिए कि इन फाइलों की जिम्मेदारी किन अधिकारियों और कर्मचारियों के पास थी, दस्तावेज कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए तथा इस पूरे प्रकरण में किसी की मिलीभगत तो नहीं रही। उन्होंने मामले की तह तक पहुंचने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
पालीवाल के अनुसार, यदि प्रत्येक भूखंड की न्यूनतम बाजार कीमत 40 लाख रुपये भी मानी जाए तो 492 भूखंडों की कुल अनुमानित कीमत करीब 196.80 करोड़ रुपये बैठती है। इस लिहाज से यह मामला लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़ा हुआ है। इतनी बड़ी संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड में अनियमितताओं की आशंका को गंभीरता से लेते हुए सभी तथ्यों की जांच आवश्यक है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने यूआईटी सचिव को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, यूआईटी सचिव ने मामले की एसओजी जांच चलने की जानकारी दी। साथ ही प्रॉपर्टी रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
मनोज पालीवाल ने कहा कि मामले में केवल भूखंडों के निरस्तीकरण की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कथित अनियमितताएं कैसे हुईं और मूल फाइलें गायब होने के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी।
फिलहाल, 492 भूखंडों के निरस्तीकरण की कार्रवाई प्रक्रियाधीन बताई जा रही है, जबकि प्रकरण की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।