मंगरोप@मुकेश खटीक।भीलवाड़ा जिले के मंगरोप कस्बे में सनातन संस्कृति और जीवों के प्रति श्रद्धा का अनूठा उदाहरण देखने को मिला।रविवार को सड़क हादसे में एक वानरराज की मौत के बाद कस्बेवासियों ने उसे पूरे हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम विदाई दी।अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग पर धार्मिक धुनों के बीच श्रद्धा और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला।जानकारी के अनुसार,माता के मंड स्थित उला-सुला बालाजी महाराज मंदिर के बाहर एक वानरराज सड़क पार करते समय तेज रफ्तार बाइक की चपेट में आ गया।हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर कस्बे के धर्मप्रेमी मौके पर पहुंचे और वानरराज का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।कानसिंह रावणा राजपूत ने बताया कि गोपाललाल कीर,लोकेश खटीक,सांवरमल कीर,कैलाश सिंह तंवर,मुकेश कीर सहित कई लोगों ने सहयोग राशि एकत्रित की।इसके बाद वानरराज को विधिवत स्नान करवाया गया। उसे धोती,कमीज और पारंपरिक राजस्थानी पगड़ी पहनाकर हाथ ठेला गाड़ी पर कुर्सी लगाकर विराजमान किया गया।श्रद्धालुओं ने गुलाल उड़ाते हुए और डीजे पर धार्मिक भजनों के बीच अंतिम यात्रा निकाली।अंतिम यात्रा माता का मंड से शुरू होकर कीर मोहल्ला,माली मोहल्ला,बड़ा मंदिर चौक,खटीक मोहल्ला और बस स्टैंड होते हुए बनास नदी तट स्थित श्मशान घाट पहुंची।पूरे मार्ग में बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी वानरराज की अंतिम यात्रा के पीछे-पीछे श्रद्धा भाव से चलते रहे।श्मशान घाट पर पंडित चन्द्रशेखर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हिंदू विधि-विधान के अनुसार वानरराज का दाह संस्कार कराया।इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और सनातन धर्म प्रेमी उपस्थित रहे।कस्बेवासियों का कहना था कि भगवान श्रीराम के परम भक्त माने जाने वाले वानरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करना सनातन संस्कृति की पहचान है।मंगरोप में निकली यह अनूठी अंतिम यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
