अनिल कुमार
ब्यावर।स्मार्ट हलचल|सोमवार को ग्राम केसरपुरा एवं नरबदखेड़ा के ग्रामीण बड़ी संख्या में भू-अवाप्ति अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुए और जयपुर से ब्यावर होते हुए जामनगर तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराईं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि आबादी, धार्मिक स्थल, अस्पताल, स्कूल एवं कृषि भूमि को बचाते हुए ही अधिग्रहण किया जाए।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान अधिसूचना के अनुसार पूरे गांव की आबादी भूमि को अधिग्रहण में लिया जा रहा है, जो पूर्णतः अनुचित है। इससे गांव के पक्के मकान, दुकानें, मंदिर, राजकीय व गैर-राजकीय स्कूल, अस्पताल तथा सार्वजनिक भवन प्रभावित होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन व आजीविका के अधिकार) का उल्लंघन है।
किसानों ने चिंता जताई कि अधिग्रहण की जद में आने वाली भूमि उपजाऊ कृषि भूमि है, जो उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। भूमि चले जाने से हजारों लोगों का रोजगार और भविष्य संकट में पड़ जाएगा। वहीं ग्रामीण महिलाओं और बुजुर्गों ने कहा कि मंदिर और अस्पताल गांव की सामाजिक व मानवीय जरूरत हैं, जिनका विस्थापन जनहित के विरुद्ध है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिग्रहण से पूर्व सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव आकलन नहीं किया गया तथा वैकल्पिक मार्गों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि परियोजना हेतु री-अलाइनमेंट (वैकल्पिक मार्ग) अपनाया जाए, जिससे आबादी क्षेत्र को बचाया जा सके।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि आबादी उजड़ती है तो उनके पास न आवास बचेगा, न खेती, न शिक्षा और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिसूचना में संशोधन करने तथा जनहित में निर्णय लेने की मांग की।
प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की आपत्तियां विधिवत दर्ज कर ली गईं और नियमानुसार परीक्षण कर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया।
आपत्ति दर्ज हेतु पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह, सरपंच आनंद सिंह, सुरेन्द्र सिंह, विक्रम सिंह, हुकम सिंह, गंगा रावत, जयदीप एवं ग्राम केसरपुरा नरबदखेड़ा इत्यादि के 1500 से अधिक ग्रामीण मौजूद थे।













