विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर चलाया जनजागरूकता अभियान

भीलवाड़ा। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर पुलिस विभाग , श्रम विभाग जिला बाल अधिकारिता विभाग एवं जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, नवाचार संस्थान सहयोगी संस्था जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन ने जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे है जिसके तहत आज 12 जून को पुलिस अधीक्षक सागर राणा के निर्देशन पर महिला थानाधिकारी अयूब खां व उनकी टीम मानव तस्करी विरोधी इकाई ईश्वर सिंह श्रम विभाग से श्रम निरीक्षक’ शिवराज जी ,कोतवाली थाना टीम बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक धर्मराज प्रतिहार के निर्देशानुसार चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 परियोजना समन्वयक हेमंत सिंह सिसोदिया, काउंसलर निर्मला पुरोहित, सुपरवाइजर राजेश कुमार एवं आनंद कुमार, केस वर्कर सुमन साहू, नवाचार संस्थान से जिला समन्वयक जितेन्द्र सिंह तोमर , भगवत सिंह व उनकी टीम शामिल रही । इस अवसर पर विभिन्न सरकारी विभागों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अफसरों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
एक्शन मंथ में अभी तक 8 बच्चे बालश्रम एवं भिक्षावृति से मुक्त कराये गये , मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र 8 से 17साल के बीच है और ये कई वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में पिछले कुछ महीने से काम कर रहे थे। शुरुआती जांच से पता चला है कि इनसे बेहद अमानवीय और शोषणकारी स्थितियों में काम लिया जा रहा था। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थितियों में मामूली पैसे पर इन्हें दिन रात खटाया जा रहा था जिससे इनकी सेहत व मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। बच्चों को मुक्त कराने के बाद जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है और पीड़ित बच्चों को पुनर्वास, मुआवजा व अन्य सुविधाएं दिलाने की प्रक्रिया जारी है जिसके वे अधिकारी हैं।
जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ ‘एक्शन मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है और चूंकि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग बाल मजदूरी का मुख्य कारण है, इसलिए नवाचार संस्थान इस दौरान पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ की शिनाख्त के लिए कड़ी नजर रखते हैं।
इस मौके पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए कहा कि , “शोषण व मजदूरी से मुक्त कराए गए हर बच्चे के शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा व गरिमा की आज एक बार फिर बहाली हुई है। बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है। बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं बल्कि स्कूल में है। चूंकि ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी आपसे में गहरे तक जुड़े हैं, हम ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों को मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन प्रशासन व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। साथ ही, हम सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे की देखभाल हो, समुचित पुनर्वास हो और उसे वो सभी सुविधाएं मिलें जिसका वह हकदार है।”