मानदेय कटौती के विरोध में महिलाओं का प्रदर्शन, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूर्ववत भुगतान की मांग
*पुनित चपलोत*
भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल|मिड-डे मील कुक-कम-हेल्परों के मानदेय में 50 प्रतिशत कटौती के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और मानदेय पूर्ववत किए जाने अथवा उचित एवं सम्मानजनक मानदेय निर्धारित करने की मांग की।प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि सरकारी विद्यालयों और मदरसों में कुक-कम-हेल्पर प्रतिदिन बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करने के साथ भोजन परोसने, बच्चों को खाना खिलाने, बर्तन धोने और रसोई की साफ-सफाई का काम करती हैं। विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं होने के कारण सफाई सहित कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी उन्हीं के जिम्मे हैं। बाल गोपाल दूध योजना के तहत दूध गर्म करने, बच्चों को पिलाने और बर्तनों की सफाई का काम भी कुक-कम-हेल्परों द्वारा किया जाता है।
महिलाओं ने बताया कि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक शिक्षा, भीलवाड़ा के 2 सितंबर 2026 के आदेश के तहत केंद्रीयकृत रसोईघर (अक्षयपात्र) से पोषाहार मिलने वाले विद्यालयों में कार्यरत कुक-कम-हेल्परों को 50 प्रतिशत मानदेय भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले ₹2400 मानदेय मिलता था, जिसे घटाकर ₹1200 कर दिया गया है। महिलाओं का कहना है कि महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल है।
सुभाष नगर स्कूल में कार्यरत सरोज ने कहा कि वह पिछले 13 वर्षों से मिड-डे मील में काम कर रही हैं और एकल महिला होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर है। उन्होंने कहा, “पहले ₹2400 मिलते थे, अब ₹1200 कर दिए। इतने पैसों में बच्चों को कैसे पालूं, घर का किराया, बिजली-पानी का बिल कैसे भरूं?”
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से दूध पिलाने का भुगतान और अप्रैल माह से पोषाहार मानदेय भी लंबित है। उन्होंने लंबित भुगतान जारी करने के साथ मानदेय कटौती का निर्णय वापस लेने की मांग की।