( महेन्द्र नागौरी)
भीलवाड़ा| स्मार्ट हलचल।शहर के व्यस्ततम नेहरू रोड स्थित श्री गेस्ट हाउस चौराहा पर जलदाय विभाग की लापरवाही आमजन के लिए खतरा बन चुकी है। करीब डेढ़ माह पूर्व विभाग ने यहां पानी की पाइपलाइन में लीकेज सुधारने के लिए सड़क खोदी थी, लेकिन मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल करना शायद विभाग भूल गया। सवाल यह है कि आखिर कब तक आम नागरिकों की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा?
चौराहे के बीचों-बीच बना यह गहरा कटाव और उखड़ी सड़क रोजाना हादसों को न्योता दे रही है। दुपहिया वाहन चालक अचानक संतुलन खोकर गिर रहे हैं, कई लोग चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बाइक सवार इस गड्ढे में फंसकर सड़क पर गिर जाते हैं और आसपास के खोमचे व ठेले लगाने वाले लोग उन्हें उठाकर संभालते हैं। यदि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या सिर्फ लीकेज निकालना ही विभाग का काम है?
शहरवासियों का आरोप है कि जलदाय विभाग पाइपलाइन लीकेज तो ठीक कर देता है, लेकिन उसके बाद सड़क की मरम्मत करना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझता। आखिर जनता को टूटी सड़कों और गड्ढों की सजा क्यों भुगतनी पड़ रही है? क्या विभाग को तब जाग आएगी जब कोई गंभीर दुर्घटना हो जाएगी?
पूरा शहर गड्ढों का जाल, जिम्मेदार मौन
यह समस्या केवल श्री गेस्ट हाउस चौराहे तक सीमित नहीं है। शहर के अनेक क्षेत्रों में जलदाय विभाग द्वारा खोदी गई सड़कें महीनों बाद भी बदहाल पड़ी हैं। दूसरी ओर सीवरेज कार्यों के बाद भी सड़कों की मरम्मत अधूरी है। नतीजा यह है कि भीलवाड़ा की सड़कों पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं रह गया है।
लोगों का कहना है कि गड्ढों, उखड़ी सड़कों, टूटे नालों और क्षतिग्रस्त नालियों ने शहर की तस्वीर बिगाड़ दी है। आखिर विकास के दावों के बीच शहर की सड़कें इतनी बदहाल क्यों हैं?
कलेक्टर के निर्देश भी बेअसर?
हाल ही में जिला कलेक्टर ने नगर निगम, नगर विकास न्यास, जलदाय विभाग सहित संबंधित विभागों की बैठक लेकर शहर में गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी हकीकत देखकर सवाल उठता है कि क्या अधिकारियों ने इन निर्देशों को गंभीरता से लिया भी है? यदि लिया होता तो डेढ़ माह से यह गड्ढा आज भी लोगों की जान के लिए खतरा क्यों बना हुआ है?
जनता की नजर में सबसे बड़ा दोषी कौन?
शहरी नागरिकों का मानना है कि सड़कों की दुर्दशा के मामले में जलदाय विभाग सबसे आगे है। जहां-जहां लीकेज सुधार के नाम पर सड़कें खोदी गईं, वहां अधिकांश स्थानों पर मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। क्या यही कारण नहीं कि भीलवाड़ा की सड़कें जगह-जगह कबाड़ जैसी हालत में पहुंच गई हैं?
बड़े हादसे का इंतजार क्यों?
मानसून सिर पर है। बारिश शुरू होते ही यह गड्ढा पानी से भर जाएगा और खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। ऐसे में सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? या फिर समय रहते इस जानलेवा गड्ढे को भरकर आमजन को राहत दी जाएगी?
शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि श्री गेस्ट हाउस चौराहे सहित पूरे शहर में जलदाय विभाग और सीवरेज कार्यों के बाद छोड़े गए गड्ढों को तत्काल भरवाया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। आखिर आमजन की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा हो सकता है क्या?
