यात्री जल्दबाजी में उड़ा रहे नियमों की खुलेआम धज्जियां, जीआरपी और आरपीएफ बनी मुकदर्शक

अनदेखी और उदासीनता रेलवे फाटक की स्थिति और गंभीर …..

भीलवाड़ा, राजेश जीनगर । रेलवे ट्रैक (पटरी) का उल्लंघन, जिसे रेलवे की भाषा में अवैध प्रवेश तक कहा जाता है। साथ ही यह एक गंभीर और दंडनीय अपराध भी माना गया है। बावजूद इसके यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर जल्दबाजी में रेलवे ट्रैक पार करते नजर आए। जबकि सुरक्षित यात्रा के लिए हमेशा फुटओवर ब्रिज या सबवे का ही इस्तेमाल करना होता है। रेलवे ट्रैक पार करने से जुड़े नियम और सजा की बात करें तो रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत पटरियों को अनाधिकृत रूप से पार करना या ट्रैक पर चलना अवैध है। ऐसा करते हुए जाने पर एक हजार तक का जुर्माना या 6 महीने तक की जेल का प्रावधान है। यदि उल्लंघन के कारण ट्रेन संचालन में बाधा आती है या जान-माल को खतरा होता है, तो रेलवे एक्ट की अन्य धाराओं (जैसे धारा 154) के तहत और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। यात्रियों की सुरक्षा और चेतावनी के बावजूद हर साल पटरियों को लापरवाही से पार करने के कारण सैकड़ों लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल द्वारा स्टेशनों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार चेकिंग अभियान भी चलाए जाते हैं। लेकिन वह महज अभियान तक ही सिमटकर रह जाते हैं और यहां नियमों की खुले आम धज्जियां उड़ती दिखाई देती है। यह सिर्फ स्टेशन की पटरियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि फाटक पर भी “जान की जाने की चिन्ता” के चलते बंद रेलवे फाटक से भी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेक पार करते नजर आ जाएंगे और स्थानीय जीआरपी व आरपीएफ मुकदर्शक बनकर देखते रहते हैं।

*श्रृद्धालुओं के लिए सिरदर्द बने चालान ….*

स्थानीय रेलवे स्टेशन परिसर स्थित बालाजी मंदिर में दर्शनों को आने वाले श्रद्धालुओं को भी जीआरपी व आरपीएफ नहीं बख्श रही है, और नो पार्किंग का चालान काट रही है। जिसके चलते श्रृद्धालुओं ने रोष गहराता जा रहा है। जबकि रेलवे पार्किंग ठेकेदार को अव्यवस्थित पार्किंग के लिए पाबंद किया जाना चाहिए, लेकिन इस अव्यवस्था का खामियाजा श्रृद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है और अव्यवस्थित पार्किंग के नोटिस थमाए जा रहें हैं, लेकिन पार्किंग ठेकेदार को पाबंद नहीं करना सैंकडों सवाल खड़े कर रहा है।