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दरोगा जी चोरी हो गई नाटक ने दिया संदेश कि युवा बुरी संगत से बचे

समर्थ कुमार सक्सेना
लखनऊ। स्मार्ट हलचल/संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली एवं संस्कृति निदेशालय उत्तर प्रदेश के सहयोग से प्रान्जल आर्ट्स डेवलपमेंट सोसाइटी और थियेटर एण्ड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में “रंगकर्म थियेटर फेस्टिवल-2024” की तीसरी और अंतिम संध्या में श्री नाट्य फाउण्डेशन की हास्य व्यंग्य नाट्य प्रस्तुति ‘‘दरोगा जी चोरी हो गई’’ का मंचन निशा बेगम की परिकल्पना और निर्देशन में वाल्मीकि रंगशाला में शुक्रवार 3 जनवरी को किया गया। जयवर्धन के लिखे इस लोकप्रिय नाटक ने संदेश दिया कि युवा, माया की चकाचौंध से प्रभावित होकर गलत संगत के चलते अपराध के रास्तों को न अपनाएं।
दरोगा जी चोरी हो गयी नाटक में दिखाया गया कि एक शादी समारोह में शामिल होने गए एक दफ्तरी बाबू के घर में 20 हजार रुपए की चोरी हो जाती है। लालची बाबू, पुलिस स्टेशन जाकर 50 हजार की चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाता है। यह बात जब चोर को पता चलती है तो वह दोबारा उस बाबू के घर जाकर अपनी नाराजगी व्यक्त करता है। इसी बीच दरोगा की एंट्री होती है और समाज का यह कड़वा सच सामने आता है कि कई लोग अंजाने में चोरी करने लगते हैं। दरअसल कोई गर्लफ्रेंड के नखरे उठाने के लिए चोरी करता है तो कोई सोशल स्टेटस बनाए रखने के लिए चोरी करता है। मंच पर बाबू शर्मा का तारिक इक़बाल, अमर का अरुण विश्वकर्मा, चोर का मोहित यादव, दरोगा लोहा सिंह का सौरभ सिंह, हवलदार तांबा सिंह का आनन्द प्रकाश शर्मा, बाबू शर्मा की पत्नी पूजा का ज़ारा हयात का किरदार बखूबी अभिनीत कर दर्शकों की प्रशंसा हासिल की। मंच परे में प्रकाश परिकल्पना का सचिन शाक्य, संगीत परिकल्पना का पल्लवी जायसवाल, मुखसज्जा का ईशा परवीन-अनु सिंह, वेशभूषा परिकल्पना का बबिता-अनीता, मंच सज्जा का मोहम्मद मुस्तकीम सलमानी ने दायित्व प्रभावी रूप से निभाया। प्रस्तुति में उद्घोशक का कार्यभार सुषमा सिंह ने संभाला जबकि प्रस्तुति नियंत्रक अशोक लाल और मोहित यादव रहे।प्रस्तुतकर्ता ए.एम.अभिषेक और प्रांजल शर्मा रहे।

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