60 वर्षों से बसे आशियानों पर यूआईटी के नोटिस से फूटा तेलीखेड़ा ग्रामीणों का गुस्सा, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

पुनित चपलोत

भीलवाड़ा // जिले के तेलीखेड़ा गांव के ग्रामीणों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले 50 से 60 वर्षों से आराजी नंबर 855 पर पक्के मकान बनाकर अपने परिवारों के साथ शांतिपूर्वक निवास कर रहे हैं। इन मकानों में नियमानुसार विद्युत कनेक्शन भी जारी हो चुके हैं। इतने दशकों में कभी भी किसी प्रशासनिक विभाग ने उन्हें अतिक्रमी नहीं माना और न ही कोई कार्रवाई की। लेकिन अब अचानक नगर विकास न्यास (यूआईटी) भीलवाड़ा द्वारा इन मकानों को अतिक्रमी बताते हुए बेदखली के नोटिस थमा दिए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास सिर छुपाने के लिए इस भूमि के अलावा और कोई आशियाना या जमीन उपलब्ध नहीं है।

प्रशासन को सौंपे गए इस ज्ञापन में सोहन तेली, गोपाल लाल, नन्दराम बैरवा, नारायण तेली, श्याम लाल, रतन लाल सहित तेलीखेड़ा के समस्त ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी इस भूमि को नियमित करने की मांग उठाई गई थी। इस पर तत्कालीन अपर जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार तहसीलदार और नगर विकास न्यास द्वारा मौका रिपोर्ट चाही गई थी। वर्ष 2018 में पटवारी द्वारा तैयार की गई मौका पर्चा रिपोर्ट और यूआईटी की अनापत्ति में भी ग्रामीणों के पक्ष को सही माना गया था। राजस्व रिकॉर्ड में यह हिस्सा भले ही रास्ते के रूप में दर्ज हो, लेकिन मौके पर पर्याप्त चौड़ा रास्ता अलग से उपलब्ध है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि जनहित और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपने ही घरों से बेदखल होने से बचाया जाए। साथ ही, उक्त आराजी को आवासीय व आबादी क्षेत्र में संपरिवर्तित कर नगर विकास न्यास को पट्टे जारी करने के आदेश दिए जाएं।