कोतवाली गंगापुर सिटी पर सवालों की बौछार: कंप्यूटर रिकॉर्ड सही या थानाधिकारी की रिपोर्ट झूठी?-कोर्ट में पेश गलत रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल

 एडवोकेट राजेन्द्र सिंह तोमर का आरोप: शिकायत दर्ज होने के बावजूद थाना प्रभारी ने कोर्ट को किया गुमराह-एफआईआर की उठी मांग

शिवराज बारवाल मीना
सवाई माधोपुर।स्मार्ट हलचल|गंगापुर सिटी कोतवाली थाना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला सीधे अदालत में पेश की गई पुलिस रिपोर्ट की सत्यता से जुड़ा है, जिसने पूरे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं हिन्दुस्तान शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह तोमर (राजा भैया) ने आरोप लगाया है कि उनकी विधिवत दर्ज शिकायत के बावजूद कोतवाली थाना प्रभारी (एसएचओ) ने कोर्ट में यह रिपोर्ट पेश कर दी कि “ऐसी कोई शिकायत प्राप्त ही नहीं हुई”।
*क्या है पूरा मामला?*
एडवोकेट राजेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार, उन्होंने 03 अक्टूबर 2025 को कोतवाली थाने में एक लिखित शिकायत दी थी, जो थाने के कंप्यूटरीकृत रोजनामचे में ऑनलाइन नंबर 275670102500362 पर दर्ज हुई थी। यह शिकायत एएसआई भरत सिंह को जांच हेतु सौंपी गई थी, जिसकी पावती और रिकॉर्ड उनके पास मौजूद है। इसके बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने 22 नवंबर 2025 को जिला पुलिस अधीक्षक सवाईमाधोपुर को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी हैं। बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
*कोर्ट में क्या हुआ?*
कार्रवाई नहीं होने पर मामला एसीजेएम न्यायालय गंगापुर सिटी की अदालत में इस्तगासा के रूप में पेश किया गया।अदालत ने जब एसएचओ से रिपोर्ट मांगी, तो थाना प्रभारी ने कोर्ट को लिखित में जवाब दिया कि “थाने में ऐसी कोई शिकायत प्राप्त ही नहीं हुई” यहीं से विवाद गहरा गया, क्योंकि शिकायतकर्ता के पास कंप्यूटर रोजनामचा परिवाद रिकॉर्ड और पावती मौजूद है, जो थानाधिकारी के दावे के विपरीत है।
*“यह सिर्फ लापरवाही नहीं,अदालत को गुमराह करना है”*
एडवोकेट तोमर का कहना है कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि गंभीर अपराध का है। उनका आरोप है कि एसएचओ ने आरोपियों को बचाने के लिए जानबूझकर झूठी और तथ्यहीन रिपोर्ट अदालत में पेश की हैं। उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक, एडीजीपी विजिलेंस, आईजी भरतपुर रेंज और एसपी सवाई माधोपुर सहित अन्य अधिकारियों को शिकायत भेजकर सम्बंधित एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
*बड़ा सवाल: सिस्टम फेल या जिम्मेदारी से बचाव?*
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या थाने का कंप्यूटर रिकॉर्ड गलत है? या फिर एसएचओ ने जानबूझकर कोर्ट में गलत जानकारी दी?अगर शिकायत दर्ज थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर नहीं थी, तो रोजनामचे व परिवाद जांच में एएसआई भरत सिंह के नाम की एंट्री कैसे हुई?
*कोर्ट ने लिया संज्ञान*
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित एसएचओ को आगामी तारीख 9 जून 2026 को तथ्यों सहित विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
*कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं?*
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोर्ट में झूठी रिपोर्ट देना साबित होता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ
आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। विभागीय कार्रवाई तय है और सजा भी हो सकती है। यह मामला केवल एक शिकायत का नहीं, बल्कि पुलिस की पारदर्शिता और जवाबदेही का है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि जांच में सच्चाई क्या सामने आती है और दोषी पर कब तक कार्रवाई होती है।