सड़क दुर्घटना के मामले में अभियुक्त सोनू स्वर्णकार दोषमुक्त, अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने की पैरवी

भीलवाड़ा। न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम-2, भीलवाड़ा ने वर्ष 2014 के एक सड़क दुर्घटना मामले में अभियुक्त सोनू स्वर्णकार को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया है। इस मामले में अभियुक्त की ओर से एडवोकेट मुकेश सुवालका ने प्रभावी पैरवी की। प्रकरण के अनुसार, 30 मार्च 2014 को पुलिस लाइन भीलवाड़ा में ड्यूटी पर तैनात कानिस्टेबल कस्तूरमल मीणा के साथ एक मोटरसाइकिल द्वारा दुर्घटना हुई थी, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने अनुसंधान के बाद सोनू स्वर्णकार के विरुद्ध धारा 279, 337, 338 भा.दं.स. एवं एम.वी. एक्ट की धाराओं के तहत न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया था।
सुनवाई के दौरान अभियुक्त के अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि दुर्घटना के समय वाहन अभियुक्त सोनू स्वर्णकार ही चला रहा था। उन्होंने जिरह के दौरान गवाहों के बयानों में विरोधाभास उजागर करते हुए बताया कि चश्मदीद गवाहों ने भी अभियुक्त को मौके पर वाहन चलाते हुए नहीं देखा था।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और एडवोकेट मुकेश सुवालका की दलीलों से सहमत होते हुए माना कि अभियुक्त के विरुद्ध अपराध संदेह से परे प्रमाणित नहीं होता है। इसी आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त सोनू स्वर्णकार को सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित कर दिया है।