पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “पांच साल तक संविदा की शर्त लगाकर सरकार युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रही है। नई सरकारी नौकरियों का प्रोबेशन पीरियड अमूमन 2 वर्ष का होता है, जिससे विसंगति के आधार पर यह मामला कोर्ट में चला जाएगा और भर्ती अधरझूल में अटक जाएगी। यह 5 वर्ष वाला नियम वाल्मीकि समाज के साथ में बहुत बड़ा धोखा होगा।”
जाड़ावत ने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि चयनित अभ्यर्थियों को पहले पांच वर्षों तक संविदा पर कार्य करना होगा और उनके कार्य, अनुशासन एवं प्रदर्शन का मूल्यांकन होने के बाद ही स्थायी नियुक्ति दी जाएगी। ऐसे में युवाओं को स्थायी रोजगार का भरोसा देने के बजाय अस्थिरता और अनिश्चितता के माहौल में धकेला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था में पारंगत वाल्मीकि समाज का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्षों से यह समाज कठिन परिस्थितियों में भी नगरों और शहरों की स्वच्छता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता आया है। इसलिए सरकार को भर्ती नीति बनाते समय वाल्मीकि समाज की भावनाओं, अनुभव और हितों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अन्य समाज सफाई कार्य को इतनी निपुणता से नहीं कर पाएंगे। जाड़ावत ने कहा कि समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाएंगे।
