राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं टीएनटी संघर्ष समिति का बूंदी जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन, मुख्यमंत्री का फूंका पुतला

बूंदी- स्मार्ट हलचल।जिले में सोमवार को डीएनटी (डीनोटिफाइड, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू) समाज, वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों की ओर से चल रहे आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया। राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जेल भरो आंदोलन में सैकड़ों लोगों ने भाग लेते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उनका पुतला भी फूंका तथा चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन पूरे प्रदेश में और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।

आंदोलन की शुरुआत पुरानी कृषि उपज मंडी यार्ड में आयोजित विशाल सभा से हुई, जहां विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और समाज के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। सभा के बाद बड़ी संख्या में लोग रैली के रूप में कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। कलेक्ट्रेट गेट पर भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण प्रदर्शनकारी परिसर में प्रवेश नहीं कर सके। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।

सभा को संबोधित करते हुए डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने कहा कि यह आंदोलन अब किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान के हर जिले में पहुंचेगा और अंततः 1 जुलाई को जयपुर में प्रस्तावित महापड़ाव के रूप में परिणत होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम 10 प्रतिशत अलग आरक्षण लेकर रहेंगे। यह हमारा संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है, जिसे किसी भी कीमत पर हासिल किया जाएगा।”

राईका ने बताया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य डीएनटी समाज की 11 सूत्रीय मांगों को पूरा करवाना है। इनमें सबसे प्रमुख मांग डीएनटी समाज के लिए अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण की है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में रेनके आयोग और ईदाते आयोग भी सिफारिश कर चुके हैं। साथ ही आरक्षण के उपवर्गीकरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अति पिछड़े वर्गों को उनका वास्तविक हक मिलना चाहिए। इसके अलावा डीएनटी समाज के लिए राजनीतिक भागीदारी, आवासीय पट्टे, भूमि आवंटन और शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग भी उठाई गई।

उन्होंने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि दूसरे दौर की वार्ता मुख्यमंत्री स्तर पर होनी चाहिए, 5 दिसंबर को हुई पहली वार्ता के बाद सरकार ने अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं बताया है तथा वार्ता की अगली तिथि और समय तुरंत घोषित किया जाना चाहिए।

डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष रतननाथ कालबेलिया ने कहा कि यह संघर्ष पिछले दो वर्षों से लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बालराई (पाली) में हुए महापड़ाव के बाद सरकार ने तीन महीने में समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज करना और लोगों को जेल भेजना सरकार की दमनकारी नीति को दर्शाता है। इसी के विरोध में अब व्यापक स्तर पर जेल भरो आंदोलन चलाया जा रहा है।

वहीं कालूराम योगी ने कहा कि अब इस आंदोलन में वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी वर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हो चुके हैं। उनका कहना था कि आरक्षण का उपवर्गीकरण समय की मांग है, जिससे सभी वर्गों को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समान अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 150 समाज इस आंदोलन के समर्थन में खड़े हैं और सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल राईका और युवा अध्यक्ष भरत सराधना ने भी आंदोलन को तेज करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक समाज को उसका अधिकार नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों ने प्रतीकात्मक गिरफ्तारी भी दी।

आंदोलन में ज्ञान सिंह कालावत, भीखू सिंह राईका, ललिता गाड़िया लुहार, पूजा गाड़िया लुहार, विनोद रेबारी, अर्जुन लाल रेबारी, छोटूलाल रेबारी, सत्यनारायण रेबारी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आंदोलनकारियों का दावा है कि जैसलमेर से जयपुर तक चलने वाला यह अभियान वंचित वर्गों को एकजुट कर सरकार पर दबाव बढ़ाएगा और सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा देगा।