पुष्कर में 2 करोड़ की लागत से मातृ-शिशु अस्पताल बनेगा, संत पांचाराम महाराज ने की घोषणा, खेजड़ा आश्रम के संत हैं पांचाराम जी महाराज

एजाज़ अहमद उस्मानी

स्मार्ट हलचल।मेड़ता के निकटवर्ती दरियाव खेजड़ा आश्रम के संत पांचाराम महाराज ने तीर्थनगरी पुष्कर में महिलाओं और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 2 करोड़ रुपए की लागत से अस्पताल निर्माण की घोषणा की है। यह घोषणा वाडभी गांव के रामसभा भवन उद्घाटन समारोह के दौरान की गई, जिसे ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संत पांचाराम महाराज लंबे समय से “मानव सेवा ही माधव सेवा” के सिद्धांत को जीवन में उतारते हुए जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अब तक वे विभिन्न सामाजिक और स्वास्थ्य परियोजनाओं में लगभग 15 करोड़ रुपए से अधिक का सहयोग दे चुके हैं।

*ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ*

प्रस्तावित अस्पताल के निर्माण के बाद पुष्कर और आसपास के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण साबित होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में प्राथमिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी मजबूत होगी।

*पहले भी स्वास्थ्य सेवाओं में दिया योगदान*

संत पांचाराम महाराज इससे पहले भी प्रदेश के कई अस्पतालों और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में सहयोग दे चुके हैं। उनके योगदान से मेड़ता सिटी के राजकीय अस्पताल को 3.71 करोड़ रुपए, नागौर और सोजत के अस्पतालों को 2.50-2.50 करोड़ रुपए की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अलावा डाडमी, रेण और मूंडवा सहित कई क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य और जनसुविधाओं के विकास कार्यों में उनका योगदान रहा है।

*जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने किया सम्मान*

पुष्कर में अस्पताल निर्माण की घोषणा के बाद राजस्थान किसान आयोग अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सी.आर. चौधरी, खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा, मंडी सचिव राजेंद्र कुमार रियाड़, डिस्कॉम एक्सईएन रामजीवन जाखड़, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता रामाकिशन झींझा, समाजसेवी भीखाराम अजनबी और दौलतराम गोदारा सहित कई गणमान्य लोगों ने संत पांचाराम महाराज का सम्मान किया और उनके सेवा कार्यों की सराहना की।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह अस्पताल बनने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आएगा और ग्रामीणों को बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी।