सरकारी इंजीनियर से संत और अब महंत, रामगिरी जी महाराज को मिली धर्मपीठ की कमान

(महेन्द्र नागौरी)

गुरु दिगम्बर धर्मगिरी जी ने सौंपा उत्तराधिकार, महंताई की चादर ओढ़कर संभालेंगे धार्मिक परंपरा की जिम्मेदारी

भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल।इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर सरकारी सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले संत रामगिरी जी महाराज अब महंत पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। धौलपुर जिले के श्री राधाकृष्ण मंदिर, मुड़ीक के महंत दिगम्बर धर्मगिरी जी महाराज ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए विधिवत महंताई की चादर ओढ़ाकर धर्मपीठ की कमान सौंपी।
धौलपुर में आयोजित धार्मिक समारोह में देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यह परंपरागत रस्म संपन्न हुई। इस अवसर पर श्री ओंकारेश्वर क्षेत्र के महंत भगीरथ गिरी जी, नारायण गिरी जी महाराज, किशन गिरी जी महाराज, नारदगिरी बाबा, कृपागिरी जी महाराज, लाल बाबा जी महाराज एवं श्यामसुंदरदास जी महाराज सहित अनेक संतों ने रामगिरी जी महाराज को आशीर्वाद प्रदान किया।
महंत रामगिरी जी महाराज का जीवन संघर्ष, सेवा और आध्यात्म का अनूठा संगम रहा है। इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने दिल्ली सरकार में राजकीय सेवा की तथा कई महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं में योगदान दिया। बाद में सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण किया और धर्म एवं समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित कर दिया।
भीलवाड़ा में श्री पंचमुखी दरबार के सामने स्थित प्राचीन शिवालय एवं श्री मंशापूर्ण महादेव मंदिर के विकास में उनका विशेष योगदान रहा है। उनके सान्निध्य में मंदिर परिसर का विस्तार, जीर्णोद्धार, गौशाला निर्माण एवं धार्मिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है।
धौलपुर से महंत पद ग्रहण कर भीलवाड़ा लौटने पर विश्व हिंदू परिषद के बद्रीलाल सोमानी, माहेश्वरी समाज के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर इनाणी, शिवलाल डिडवानिया, सत्यनारायण सोनी, प्रहलाद काल्या, ओमप्रकाश अग्रवाल तथा महेंद्र खोईवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक धार्मिक नियुक्ति नहीं बल्कि सेवा, समर्पण और सनातन परंपरा के संरक्षण का गौरवपूर्ण क्षण बताया।