सुनेल तहसील में अव्यवस्थाओं का आरोप: न्यायालय के आदेश के बाद भी किसानो को नहीं मिला कब्जा, अतिक्रमणों पर भी उठे सवाल

स्मार्ट हलचल।सुनेल तहसील इन दिनों विभिन्न प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और लंबित मामलों को लेकर चर्चा में है। क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील में आमजन के कार्यों की अनदेखी हो रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
चार साल न्याय की लड़ाई, फिर भी नहीं मिला कब्जा-
जानकारी के अनुसार सुनेल निवासी बालाराम, देवीलाल व अन्य परिवार के सदस्य किसानो ने अपनी भूमि से जुड़े विवाद में न्याय पाने के लिए करीब चार वर्षों तक न्यायालय की शरण ली। लंबे संघर्ष के बाद अगस्त 2025 में उपखंड अधिकारी न्यायालय, पीड़ावा द्वारा इनके पक्ष में निर्णय सुनाया गया। लेकिन किसानो का आरोप है कि न्यायालय का फैसला आने के कई माह बाद भी उसे भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया है।
पीड़ित किसान लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने से वह निराश है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें सीमा ज्ञान और कब्जा दिलाने की कार्रवाई लंबे समय से लंबित पड़ी हुई है।
अवैध अतिक्रमणों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोप
सूत्रों के अनुसार तहसील क्षेत्र के कई गांवों में सरकारी भूमि, चारागाह भूमि एवं अन्य सार्वजनिक भूमि पर अवैध अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर स्थायी निर्माण भी किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार तहसील प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बजाय उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
चारागाह भूमि मुक्त कराने की मांग भी अधर में
विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी करीब आठ माह पूर्व एक प्रशासनिक शिविर के दौरान तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर गो-चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मांग के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमणों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में सरकारी एवं चारागाह भूमि को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों ने की उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन एवं उच्च राजस्व अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने, न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित करने तथा सरकारी और चारागाह भूमि पर हुए अतिक्रमणों के विरुद्ध अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि आमजन को न्याय दिलाने और प्रशासन पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।
वर्जन
तहसीलदार का न्यायालय के हर आदेशों की पालना करने का कर्तव्य होता है अगर इस तरह का मामला है तो दिखवाकर आवश्यक कार्रवाई करवाई जाएगी।
दिनेश कुमार मीणा
उपखंड अधिकारी पिडावा