दुर्लभ मामला: तहनाल में भेड़ ने बिन पैरों के मेमने को दिया जन्म,शरीर पर पैरों के प्राकृतिक निशान तक नहीं,फिर भी स्वस्थ मेमना

(किशन वैष्णव)

शाहपुरा@स्मार्ट हलचल।क्षेत्र के तहनाल गांव में प्रकृति का एक बेहद दुर्लभ मामला सामने आया है।किसान अम्बालाल गाडरी की भेड़ ने एक ऐसे मेमने को जन्म दिया है।जिसके चारों पैर नहीं हैं।इतना ही नहीं ग्रामीणों ने बताया कि उसके शरीर पर पैरों के प्राकृतिक निशान तक दिखाई नहीं देते। इस अनोखे जन्म की सूचना फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मेमने को देखने पहुंचने लगे।ग्रामीणों के अनुसार नवजात मेमना फिलहाल स्वस्थ है और मां का दूध पी रहा है।ग्रामीणों ओर किसान अम्बालाल गाडरी ने दावा किया है कि पिछले वर्ष भी इसी भेड़ ने इसी प्रकार के जन्मजात विकार वाले मेमने को जन्म दिया था।उस समय मेमना करीब 10 दिन तक जीवित रहा। चारों पैर नहीं होने के कारण वह न तो चल-फिर सकता था और न ही अपने बल पर खड़ा हो पाता था। परिवार के सदस्य उसकी लगातार देखभाल करते थे। उसे हाथ से दूध पिलाया जाता था और जब भेड़ उसके पास बैठती थी, तब वह स्वयं भी दूध पी लेता था। लगातार 10 दिन तक सेवा और देखभाल के बावजूद अंततः उसकी मृत्यु हो गई।ग्रामीण गोवर्धन सिंह राणावत ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष एक ही भेड़ द्वारा इस प्रकार के मेमने का जन्म होने से पूरे गांव में कौतूहल का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस तरह का मामला नहीं देखा।वही कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामले जन्मजात शारीरिक विकृति,आनुवंशिक कारणों या गर्भ में भ्रूण के विकास के दौरान आई असामान्यता के कारण हो सकते हैं। हालांकि इस मामले का वास्तविक कारण पशु चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल यह दुर्लभ घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।इस घटना को सुनकर लोग आश्चर्य चकित हो गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि इस मेमने के सभी।अंग पूर्ण विकसित है और व्यवस्थित है।ओर किसान का कहना है कि पूर्ण गर्भकाल होने के बाद ही मेमने का जन्म हुआ है और सामान्यत: गर्भ में कम उम्र के बछड़े तथा अपूर्ण विकसित बछड़े के भी पैर होते है चाहे पूर्णरूप से पोषणयुक्त या विकसित नहीं होते लेकिन इस मेमने के बिल्कुल पैर के प्राकृतिक निसान तक नहीं है।जिससे चर्चा का विषय बना हुआ है।