8 साल से तबादले बंद, तृतीय श्रेणी शिक्षकों का फूटा गुस्सा; मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

पदोन्नति, पे-प्रोटेक्शन और टेट अनिवार्यता के आदेश वापस लेने की मांग, कहा- वरिष्ठता छोड़ने को भी तैयार हैं शिक्षक

सुनेल 10 जुलाई |
स्मार्ट हलचल|राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले पिड़ावा उपखंड क्षेत्र के तृतीय श्रेणी अध्यापकों ने शुक्रवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने वर्ष 2018 से तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले बंद होने पर नाराजगी जताते हुए शीघ्र तबादला नीति लागू करने की मांग की। शिक्षक नेता महेश सैनी ने कहा कि प्रदेश के लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों के तबादले हो रहे हैं, लेकिन तृतीय श्रेणी अध्यापक पिछले आठ वर्षों से तबादलों से वंचित हैं। इससे हजारों शिक्षक पारिवारिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का यह तर्क कि तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले से उनकी वरिष्ठता समाप्त हो जाती है, पूरी तरह उचित नहीं है। हाल ही में द्वितीय श्रेणी अध्यापकों के भी मंडल से बाहर तबादले किए गए हैं, जहां वरिष्ठता समाप्त होने का प्रावधान लागू होता है। ऐसे में समान नियमों के तहत तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले भी किए जाने चाहिए। सैनी ने कहा कि यदि वरिष्ठता विलोपन ही बाधा है तो प्रदेश के तृतीय श्रेणी अध्यापक अपनी वरिष्ठता छोड़ने और इसके लिए शपथ पत्र देने तक को तैयार हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबे समय से लंबित तबादलों को तत्काल खोला जाए। ज्ञापन में पिछले छह वर्षों से लंबित पदोन्नतियां शीघ्र करने, पे-प्रोटेक्शन से जुड़े विवादों का समाधान करने तथा टेट अनिवार्यता के नाम पर शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाले आदेशों को वापस लेने की भी मांग की गई।
ज्ञापन कार्यक्रम में संगठन के उपशाखा अध्यक्ष हजारीलाल दांगी, सभा अध्यक्ष तूफान सिंह, पूर्व अध्यक्ष मेहरबान सिंह, शिक्षक नेता मदन दिलावर, रतिराम भाटी, जुगल किशोर शर्मा, रामजीलाल कुमावत, सुनील सैनी, सुरेश दूत, इंद्रसेन भांम्बू, रामविलास शर्मा, भागचंद जाट, धर्मपाल जाट, विक्रम सिंह, बीरम जाट, प्रहलाद मीणा, सुखविंदर सिंह, पूरणमल बैरवा, प्रेमशंकर, सुरेश दांगी, कपिल देव, गोविंद सिंह, प्रमोद नेहरा, अनिल जाट सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।