दूल्हेपुरा में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला गरमाया, ग्रामीणों ने अधिकारियों पर मिलीभगत का लगाया आरोप

भीलवाड़ा । आसींद विधानसभा क्षेत्र के अंटाली तहसील के ग्राम पंचायत दूल्हेपुरा में सरकारी भूमि (खसरा संख्या 459/2 – गेमू आबादी) पर किए गए अवैध अतिक्रमण और स्थानीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और अतिक्रमण हटाने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि गेमू आबादी के रूप में दर्ज राजकीय भूमि, जो वर्षों से सार्वजनिक रास्ते और आबादी नाले के रूप में उपयोग में ली जा रही थी, उस पर 15 जून 2026 को दबंगों ने तारबंदी कर अतिक्रमण कर लिया। इसके बाद 30 जून 2026 को वहां ईंटों की दीवार का अवैध निर्माण शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों ने तत्कालीन ब्लॉक विकास अधिकारी भंवर सिंह चरण और ग्राम विकास अधिकारी ललित कोठारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अतिक्रमण की सूचना तत्काल अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन न तो निर्माण रोका गया और न ही अतिक्रमण हटाया गया। शिकायत में कहा गया है कि अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट में तथ्यों को छिपाकर भ्रम फैलाया है। रिपोर्ट में यह झूठ लिखा गया कि 7 जुलाई 2026 को रास्ता खुलवा दिया गया था, जबकि मौके पर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा करने के लिए शिकायतकर्ता को सूचना दिए बिना ही मनमर्जी से रिपोर्ट तैयार की और कुछ विशेष लोगों के हस्ताक्षर लेकर उसे पूरे गांव की सहमति बता दिया। ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनके पास उस समय की कॉल रिकॉर्डिंग, राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतें और अवैध निर्माण के वीडियो-फोटो प्रमाण के रूप में मौजूद हैं, जिसे वे जांच के दौरान प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को तत्काल हटाकर रास्ते को पुनः बहाल किया जाए। संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।