शाहपुरा की शिक्षा में नई उड़ान- प्रवासी उद्योगपति संजय डांगी ने भेंट की ब्रेन साइंस लैब, अब आधुनिक तकनीक से जुड़ेगा हर विद्यार्थी

मूलचन्द पेसवानी

शाहपुरा।स्मार्ट हलहल|शिक्षा के क्षेत्र में जब समाज के भामाशाह आगे आते हैं तो केवल भवन ही नहीं बनते, बल्कि भविष्य संवरता है। इसी सोच को साकार करते हुए शाहपुरा के प्रवासी उद्योगपति एवं प्रेरणास्रोत समाजसेवी संजय डांगी ने एक बार फिर अपनी जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए आर्य समाज द्वारा संचालित श्रीमद दयानंद महिला शिक्षण केंद्र को अत्याधुनिक ब्रेन साइंस लैब भेंट कर शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत कर दी है। इस नई सुविधा के शुरू होने से अब विद्यालय के विद्यार्थी आधुनिक विज्ञान, तकनीक और स्मार्ट एजुकेशन से सीधे जुड़ सकेंगे। यह लैब बच्चों की तार्किक क्षमता, स्मरण शक्ति, रचनात्मक सोच, विज्ञान के प्रति रुचि और तकनीकी समझ को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भीलवाड़ा जिले में निजी क्षेत्र का यह एकमात्र ऐसा विद्यालय है, जहां विद्यार्थियों को अधिकांश सुविधाएं निशुल्क अथवा अत्यंत न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आर्य समाज वर्षों से निरंतर कार्य कर रहा है। अब ब्रेन साइंस लैब की स्थापना से यह विद्यालय आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नई पहचान बनाने जा रहा है।
शनिवार को शाहपुरा के ऐतिहासिक महलों के चैक स्थित आर्य समाज परिसर में आयोजित गरिमामय समारोह में ब्रेन साइंस लैब का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डांगी परिवार की ओर से संपत डांगी, सुशील डांगी एवं सुनीता डांगी ने फीता काटकर लैब का शुभारंभ किया। उद्घाटन के साथ ही विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बच्चों ने नई तकनीकी सुविधाओं को देखकर खुशी व्यक्त की और इसे अपने भविष्य के लिए एक बड़ा अवसर बताया।
विद्यार्थियों के लिए वरदान बनेगी ब्रेन साइंस लैब–
विद्यालय प्रशासन के अनुसार ब्रेन साइंस लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान आधारित गतिविधियों, डिजिटल शिक्षण, मानसिक विकास, रचनात्मक प्रयोग, तार्किक विश्लेषण तथा आधुनिक तकनीकी उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। आज का युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, डिजिटल लर्निंग और विज्ञान आधारित नवाचारों का है। ऐसे समय में ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी महानगरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
ब्रेन साइंस लैब में उपलब्ध सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को विकसित करने, उनकी एकाग्रता बढ़ाने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मजबूत आधार तैयार करने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रयोगशालाएं बच्चों के मानसिक विकास को गति देने के साथ-साथ उनमें नवाचार और अनुसंधान की भावना भी विकसित करती हैं।
संजय डांगी बने समाज के लिए प्रेरणा–
प्रवासी उद्योगपति संजय डांगी लंबे समय से अपनी जन्मभूमि शाहपुरा के विकास और शिक्षा के उत्थान के लिए निरंतर योगदान देते रहे हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्ची सफलता वही है, जो समाज को लौटाई जाए। शिक्षा के क्षेत्र में उनका यह योगदान केवल एक लैब की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य में किया गया निवेश है। संजय डांगी जैसे भामाशाह समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने यह संदेश दिया है कि यदि प्रत्येक सफल व्यक्ति अपने गांव, कस्बे या शहर के विद्यालयों के विकास में सहयोग करे तो सरकारी और निजी संस्थानों के बीच संसाधनों की खाई काफी हद तक समाप्त हो सकती है। उनके इस प्रेरणादायी कार्य की समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने मुक्तकंठ से सराहना की और इसे शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया।
हर वर्ष की परंपरा निभाते हुए हुआ यूनिफॉर्म और पुस्तकों का वितरण–
ब्रेन साइंस लैब के उद्घाटन के पश्चात विद्यालय में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला स्कूल यूनिफॉर्म एवं पाठ्यपुस्तक वितरण समारोह भी बड़े उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य समाज के पूर्व प्रधान हीरालाल आर्य ने की।
मुख्य अतिथि के रूप में संपत डांगी, सुशील डांगी एवं सुनीता डांगी उपस्थित रहे। वहीं समाजसेवी जोरावर सकलेचा एवं रमेश सोनी विशेष भामाशाह के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। समारोह में विद्यार्थियों को नई स्कूल यूनिफॉर्म एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। नई वर्दी और किताबें पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहयोग किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। विद्यालय द्वारा वर्षों से यह परंपरा निभाई जा रही है, जिससे कोई भी विद्यार्थी आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
आर्य समाज की सेवा भावना बनी मिसाल–
शाहपुरा का श्रीमद दयानंद महिला शिक्षण केंद्र केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक समर्पण का प्रतीक बन चुका है। यहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना भी प्रदान की जाती है। विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि निजी क्षेत्र का होने के बावजूद यहां विद्यार्थियों को अधिकांश सुविधाएं निशुल्क अथवा अत्यंत न्यून शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती हैं। यही कारण है कि यह संस्था वर्षों से समाज के विश्वास का केंद्र बनी हुई है।
भामाशाहों का हुआ सम्मान–
समारोह के दौरान शिक्षा और समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भामाशाहों का सम्मान भी किया गया। विशेष रूप से शंकर अग्रवाल एवं कमल मनियार का अभिनंदन कर उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि समाज के ऐसे दानदाताओं के सहयोग से ही शिक्षा के मंदिर निरंतर प्रगति कर रहे हैं और हजारों विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल बन रहा है।
आर्य समाज के पदाधिकारी रहे उपस्थित–
कार्यक्रम में आर्य समाज के सभी पदाधिकारी एवं सभासद बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें वर्तमान प्रधान गोपाल राजगुरु, मंत्री सुनील कुमार बेली, कोषाध्यक्ष प्रेम शारदा, उपप्रधान रामस्वरूप काबरा, सभासद ओमप्रकाश चितलांगिया, ज्ञान चेचानी, जयदेव जोशी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। नगर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिकों, अभिभावकों तथा समाजसेवियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
प्रधानाध्यापिका ने जताया आभार–
विद्यालय की संस्था प्रधानाध्यापिका मिथलेश कंवर ने सभी अतिथियों, भामाशाहों, आर्य समाज के पदाधिकारियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से विद्यालय निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ब्रेन साइंस लैब विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और आने वाले समय में यहां के विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।
शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल–
शाहपुरा के लिए यह दिन शिक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। जहां एक ओर विद्यार्थियों को आधुनिक ब्रेन साइंस लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधा मिली, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद बच्चों को यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकों का वितरण कर यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि समान अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम भी है।
प्रवासी उद्योगपति संजय डांगी की प्रेरणादायी सोच, आर्य समाज की सेवा भावना और भामाशाहों के सहयोग से श्रीमद दयानंद महिला शिक्षण केंद्र आज उस दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां आर्थिक अभाव किसी बच्चे के सपनों की राह में बाधा नहीं बनेगा। आधुनिक तकनीक, संस्कारयुक्त शिक्षा और समाज के सहयोग का यह संगम निश्चित रूप से आने वाले वर्षों में शाहपुरा के विद्यार्थियों के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आधार बनेगा।