‘सफलता की पहली कहानी’ या प्रचार की पहली कड़ी? टूटा पेड़ हटाने पर वाहवाही, पट्टों का इंतजार बरकरार

नगर पालिका ने पेड़ हटाने को बताया शिविर की बड़ी उपलब्धि, शहर में चर्चा—जनता को चाहिए पट्टे और समाधान, सिर्फ प्रेस नोट नहीं।

अलकेश पारीक

जहाजपुर। स्मार्ट हलचल|नगर पालिका द्वारा आयोजित शहरी सेवा शिविर-2026 की पहली “सफलता की कहानी” सामने आते ही शहर में नई चर्चा शुरू हो गई है। पालिका ने आशापुरा माताजी मंदिर के पास सड़क पर गिरे एक नीम के पेड़ को हटाने की कार्रवाई को शिविर की पहली बड़ी उपलब्धि बताते हुए प्रेस नोट जारी किया है। लेकिन आमजन सवाल उठा रहे हैं कि क्या नगर पालिका की नियमित जिम्मेदारी निभाना ही अब “सफलता की कहानी” कहलाएगा?
नगरवासियों का कहना है कि सड़क पर गिरे पेड़ को हटाना पालिका का रोजमर्रा का दायित्व है। ऐसे कार्य को विशेष उपलब्धि बताकर प्रचारित किए जाने से यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं शिविर का फोकस वास्तविक जनसमस्याओं के समाधान से ज्यादा प्रचार पर तो नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल पट्टों के वितरण को लेकर उठ रहा है। अधिशासी अधिकारी (ईओ) का पद लंबे समय तक खाली रहने के बाद भी अब तक किसी पात्र नागरिक को पट्टा जारी नहीं हो सका है। जबकि शहरी सेवा शिविर से लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों से लंबित पट्टे, नामांतरण, सफाई, नालियां, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण होगा।
शहर में चर्चा है कि यदि शिविर वास्तव में “त्वरित समाधान” के लिए आयोजित किया गया है तो उसकी सफलता का पैमाना ऐसे कार्य होने चाहिए जिनसे आमजन को सीधा लाभ मिले। केवल एक पेड़ हटाने की कार्रवाई को “सफलता की पहली कहानी” बताना लोगों के बीच सवाल खड़े कर रहा है।
नगरवासियों का कहना है कि शहरी सेवा शिविर का उद्देश्य तभी सार्थक माना जाएगा, जब लंबित पट्टों का वितरण, नागरिक सुविधाओं का समयबद्ध समाधान और जनहित के महत्वपूर्ण कार्य धरातल पर दिखाई दें। फिलहाल शहर में यही चर्चा है कि पहली सफलता प्रेस नोट में दिखी है, अब लोगों को वास्तविक सफलता का इंतजार है।