शाहपुरा की धरोहर को मिलेगा नया गौरव, दो भव्य पैनोरमा बनेंगे इतिहास और आध्यात्म का जीवंत दस्तावेज

राजस्थान धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने निर्माण कार्य का किया निरीक्षण, जोधपुर के गुलाबी पत्थर से निखरेगी विरासत की पहचान

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
राजस्थान की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुंचाने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब शाहपुरा में साकार होती नजर आ रही है। क्रांतिकारी शहीद ठाकुर केसरी सिंह बारहठ तथा विश्वविख्यात रामस्नेही संप्रदाय पर आधारित दो भव्य पैनोरमा का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इन दोनों परियोजनाओं का राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने मौके पर पहुंचकर गहन निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता, स्वरूप तथा समयबद्धता को लेकर अधिकारियों एवं संवेदकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान लखावत ने कहा कि पैनोरमा केवल भवन नहीं होते, बल्कि वे किसी महापुरुष, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत परिचय होते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि दोनों पैनोरमा के निर्माण में जोधपुर के गुलाबी पत्थर का उपयोग कर भवनों को राजस्थानी स्थापत्य की भव्यता एवं सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप संवारा जाए, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को राजस्थान की समृद्ध विरासत का वास्तविक अनुभव हो सके।
उन्होंने निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों, कारीगरों और संवेदकों से कहा कि गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए तथा प्रत्येक कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप समय पर पूरा किया जाए।

क्या होता है पैनोरमा?–
राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के महापुरुषों, लोकदेवताओं, स्वतंत्रता सेनानियों, संतों एवं ऐतिहासिक विभूतियों के जीवन, संघर्ष, विचार और योगदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर पैनोरमा विकसित किए जा रहे हैं। इन पैनोरमा में आकर्षक दीर्घाएं, दुर्लभ चित्र, मूर्तियां, डिजिटल डिस्प्ले, ध्वनि-प्रकाश (साउंड एंड लाइट) प्रभाव, मल्टीमीडिया प्रस्तुति तथा ऐतिहासिक घटनाओं का जीवंत चित्रण किया जाता है। इससे नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ती है, वहीं पर्यटन को भी नया आयाम मिलता है।
शाहपुरा में निर्माणाधीन ठाकुर केसरी सिंह बारहठ पैनोरमा स्वतंत्रता आंदोलन के उस महान क्रांतिकारी की राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान की अमर गाथा को प्रदर्शित करेगा, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चेतना का अलख जगाया। वहीं रामस्नेही संप्रदाय पैनोरमा संत परंपरा, आध्यात्मिक जीवन, मानवता, प्रेम, सेवा और स्वामी रामचरणजी महाराज की शिक्षाओं को आधुनिक माध्यमों से जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त केंद्र बनेगा।
निरीक्षण के दौरान लखावत ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं समाजजनों से भी चर्चा की और विश्वास जताया कि दोनों पैनोरमा पूर्ण होने के बाद शाहपुरा प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
इस अवसर पर शाहपुरा के पूर्व पालिका अध्यक्ष रघुनंदन सोनी, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष राजेश पारीक, प्रताप सिंह बारहठ सेवा संस्थान के सचिव कैलाश जाड़ावत, युवराज सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।