करोड़ों खर्च के बाद भी कटिया पंचायत बदहाल, कार्यकाल के आखिरी दौर में सड़क शिलान्यास पर उठे सवाल

 

मझरा झसिया में जलभराव और कीचड़ से ग्रामीण परेशान, विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर बहस तेज

लखीमपुर खीरी। स्मार्ट हलचल|विकास खंड लखीमपुर सदर की ग्राम पंचायत कटिया में विकास कार्यों को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। विशेष रूप से मझरा झसिया में बरसात के दौरान सड़कों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या आज भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। ऐसे में प्रधानी कार्यकाल समाप्त होने के अंतिम चरण में सड़क का शिलान्यास होने से ग्रामीणों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

शनिवार को सदर विधायक योगेश वर्मा द्वारा मझरा झसिया में एक सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। हालांकि शिलान्यास के साथ ही स्थानीय लोगों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि यह सड़क क्षेत्र की आवश्यकता थी तो इसका निर्माण कार्य कार्यकाल के अंतिम समय तक क्यों टलता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक समस्या जस की तस बनी रही और अब कार्यकाल समाप्ति से ठीक पहले विकास कार्यों की शुरुआत की जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार मझरा झसिया में बारिश के समय अधिकांश सड़कें पानी से भर जाती हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़क और नाली का अंतर तक समाप्त हो जाता है, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो जाता है।

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्यों पर बड़ी धनराशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन कई स्थानों पर उसका अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का आरोप है कि नालियों, सड़कों और जल निकासी की व्यवस्था आज भी अधूरी है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि पंचायत में योजनाओं के तहत व्यापक विकास कार्य हुए हैं, तो फिर मझरा झसिया जैसे इलाके आज भी जलभराव और बदहाल सड़कों की समस्या से क्यों जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि केवल शिलान्यास करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

इस संबंध में विकास खंड स्तर के अधिकारियों का कहना है कि पंचायत में विभिन्न विकास योजनाओं के तहत अनेक कार्य कराए गए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दावों की वास्तविक तस्वीर धरातल पर अलग दिखाई देती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से जूझना पड़ रहा है, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? कार्यकाल के अंतिम दौर में हो रहे शिलान्यास को लेकर भी लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि यह नियमित विकास प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर केवल औपचारिकता।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे पंचायत क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने तथा अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।