कोटा सिर्फ कोचिंग नगरी नहीं, स्थापत्य और विरासत का भी समृद्ध केंद्र

कोटा की स्थापत्य विरासत ने देशभर के विशेषज्ञों को किया आकर्षित, रिवर फ्रंट पर कला के रंगों में उतरी कोटा की पहचान

नेक्ससंगम-2026 के दूसरे दिन योग-जुम्बा से हुई शुरुआत, विशेषज्ञों ने रिवर फ्रंट की खूबसूरती को कैनवास पर उकेरा

कोटा की विरासत से रूबरू हुए देशभर के विशेषज्ञ, रिवर फ्रंट पर दिखी स्थापत्य और कला की जुगलबंदी

कोटा। स्मार्ट हलचल|चंबल के तट पर विकसित कोटा रिवर फ्रंट रविवार को देशभर से आए वास्तुविदों, आर्किटेक्ट्स, इंटीरियर डिजाइनर्स, लैंडस्केप विशेषज्ञों और नगर नियोजकों के लिए सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवंत स्थापत्य प्रयोगशाला बन गया। ‘नेक्ससंगम-2026’ के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने कोटा की स्थापत्य विरासत, शहरी विकास और रिवर फ्रंट की विविध संरचनाओं को करीब से देखा और अपनी दृष्टि से उन्हें कागज पर उकेरा।
इजि. राजेश गुप्ता ने बताया कि दिन की शुरुआत रिवर फ्रंट पर योग गुरु इंजीनियर मनीष जैन द्वारा योग से हुई। इसके बाद विशेषज्ञों ने रिवर फ्रंट के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कर इसकी वास्तुकला, लैंडस्केप, सार्वजनिक स्थलों, जल संरचनाओं और सौंदर्यबोध का अवलोकन किया। चंबल माता मंदिर, हेरिटेज चबूतरा, राजस्थानी घाट, मुकुट महल, कनक महल, नंदी प्रतिमा, चंबल माता की प्रतिमा, गन मेटल की मूर्तियां, ऑक्सीजोन तथा विभिन्न घाटों और विकसित लैंडस्केप क्षेत्रों ने विशेषज्ञों का विशेष ध्यान खींचा।

इंजीनियर मनीष जैन ने बताया कि
किसी ने घाटों की स्थापत्य रेखाओं को कागज पर उतारा तो किसी ने चंबल के प्रवाह और उसके किनारों के लैंडस्केप को अपनी कला का विषय बनाया। किसी कलाकार ने भव्य चंबल माता मंदिर को चित्रित किया तो किसी ने मुकुट महल और हेरिटेज क्षेत्र की बारीकियों को रेखांकन के माध्यम से प्रस्तुत किया। कुछ विशेषज्ञों ने रिवर फ्रंट की मूर्तिकला, घाटों की सीढ़ियों और सार्वजनिक स्थानों की संरचना को अपनी रचनात्मक दृष्टि से कागज पर उतारा। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने कोटा के विकास मॉडल और स्थापत्य प्रयोगों पर अपनी राय भी साझा की उन्होंने कहा कि कोटा की पहचान केवल शिक्षा नगरी के रूप में नहीं, बल्कि हाड़ौती की समृद्ध स्थापत्य एवं सांस्कृतिक विरासत के कारण भी है। चंबल रिवर फ्रंट ने शहर की नदी से जुड़ी पहचान को नए रूप में सामने रखा है। यहां परंपरा, आधुनिकता, कला, लैंडस्केप और सार्वजनिक उपयोगिता को एक साथ देखने का अवसर मिलता है।
राजेश गुप्ता ने कहा कि ‘विरासत, अनुभव और विदाई’ के तहत ‘विजन कोटा—उद्देश्य के साथ मिशन’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को चित्रांकन, मार्गदर्शित शैक्षणिक भ्रमण और कोटा की विरासत एवं स्थापत्य की अनुभवात्मक यात्रा कराई गई। इस दौरान कोटा के ऐतिहासिक स्वरूप, आधुनिक शहरी विस्तार, पर्यटन की संभावनाओं तथा भविष्य के नगर नियोजन पर भी विचार-विमर्श हुआ।

आर्किटेक्ट निरुत्तम सिंह राठौर ने कहा कि ‘नेक्ससंगम-2026’ का उद्देश्य केवल विशेषज्ञों का सम्मेलन करना नहीं, बल्कि विभिन्न विधाओं के बीच संवाद स्थापित कर ऐसे विचार सामने लाना है, जो आने वाले समय में शहरों के विकास की दिशा तय कर सकें। कोटा की विरासत और रिवर फ्रंट का प्रत्यक्ष अनुभव इस आयोजन को विशेष आयाम प्रदान कर रहा है।

कमलेश शर्मा जी ने बताया की कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजन से जुड़े विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर शुभकामनाएं दी गईं। एमओसी की भूमिका इंजीनियर मनीष जैन, आर्किटेक्ट अंशिका गोयल और इंटीरियर डिजाइनर राजविंदर कौर ने निभाई।

आयोजन समिति में कमलेश शर्मा, ब्रजेश मुक्तावत मनीषा मुक्तावत, जे के शर्मा , राजेश गुप्ता, निरुत्तम सिंह राठौर, भुवनेश लाहोटी, ओम जैन, राकेश जड़िया, पीयूष लाहोटी सचिन शर्मा सौरभ गुप्ता, आर्किटेक्ट पराग जैन, आर्किटेक्ट श्रद्धा लाहोटी, इंजीनियर सचिन शर्मा, इंटीरियर डिजाइनर राजविंदर कौर, दीपिका शक्तावत, वास्तुविद निरुत्तम सिंह राठौड़, राजेश गुप्ता और ब्रजेश मुक्तावत सहित अन्य सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
देशभर से पहुंचे विशेषज्ञों में आर्किटेक्ट संदीप दंडवते, कपिल तिवारी, विकास जैन, रीमा गुप्ता, पीयूष परेता, शहनवाज खान, अंशिका गोयल, इंटीरियर डिजाइनर अजीज बोहरा, मनीषा शिवानानी और तौसीफ अंसारी सहित अनेक विशेषज्ञ शामिल रहे। गुरुग्राम के वास्तुविद राजीव खन्ना एवं सबीना वीना खन्ना ने लैंडस्केप से जुड़े पहलुओं का अवलोकन किया। वास्तुविद निरुत्तम सिंह राठौड़ ने भी कोटा की स्थापत्य संभावनाओं पर विचार साझा किए।