पुर में बिजली व्यवस्था बेहाल, बारिश की बूंदों के साथ गुल हो जाती है बिजली

 

गांवों से भी बदतर हालात, 12 कर्मचारियों के ठेके में मौके पर सिर्फ 2; ग्रिड पर एक कर्मचारी के भरोसे तीन शिफ्ट

भीलवाड़ा( महेन्द्र नागौरी )
स्मार्ट हलचल|शहर के उपनगर पुर में बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। बारिश और हवा शुरू होते ही बिजली गुल होना यहां आम बात हो गई है। हालात इतने बदतर हैं कि शहर का यह इलाका गांवों से भी बदतर बिजली व्यवस्था झेल रहा है। AVVNL सिटी द्वितीय और सिक्योर कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि उपभोक्ताओं से निर्बाध बिजली आपूर्ति के नाम पर नियमित रूप से विद्युत शुल्क वसूला जा रहा है।
पेड़ों की कटिंग नहीं, हल्की हवा में ही फॉल्ट
पुर क्षेत्र में 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों से सटकर खड़े पेड़ बिजली आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। आरोप है कि समय पर पेड़ों की कटिंग नहीं होने से बारिश और हवा के दौरान लाइनें फॉल्ट हो जाती हैं। इसके बाद घंटों तक बड़े इलाके की बिजली आपूर्ति ठप रहती है।
इतना ही नहीं, जीओ/डीओ फ्यूज सिस्टम का भी प्रभावी इस्तेमाल नहीं होने से छोटी खराबी का असर बड़े क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था होने के बावजूद उसका प्रभावी संचालन नहीं किया जा रहा।
10-12 कर्मचारियों का प्रावधान, मैदान में सिर्फ दो
बिजली व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए ठेके पर लगाई गई एफआरटी टीम में मैनपावर की भारी कमी का आरोप है। ठेके में करीब 10-12 कर्मचारियों का प्रावधान होने के बावजूद पुर क्षेत्र में कथित तौर पर मात्र दो कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।
ऐसे में फॉल्ट आने पर सीमित कर्मचारियों पर पूरा क्षेत्र संभालने का दबाव रहता है और खराबी दूर होने में लंबा समय लग जाता है। इसका सीधा खामियाजा उपभोक्ताओं को घंटों बिजली कटौती के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
एक कर्मचारी के भरोसे तीन शिफ्ट का ग्रिड संचालन
सबसे गंभीर स्थिति ग्रिड संचालन की बताई जा रही है। नियमानुसार तीनों शिफ्ट में अलग-अलग तकनीकी कर्मचारियों की आवश्यकता के बावजूद वर्तमान में एक ही तकनीकी कर्मचारी के भरोसे तीन शिफ्ट चलाने का आरोप है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि सुरक्षा और तकनीकी प्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शुल्क पूरा, सुविधा अधूरी—उपभोक्ताओं में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि उपभोक्ताओं से बिजली आपूर्ति के लिए पूरा शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद मामूली बारिश और हवा में घंटों बिजली गायब हो जाती है। संसाधनों और मैनपावर की कमी का खामियाजा आखिर उपभोक्ता क्यों भुगतें? यही सवाल अब पुर क्षेत्र में जोर पकड़ रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार पर्यावरण सुरक्षा एवं भ्रष्टाचार निवारण संगठन के जिला अध्यक्ष एवं भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला मंत्री रतनलाल आचार्य द्वारा जिला प्रशासन और निगम के अधीक्षण अभियंता को पत्र एवं व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत भेजकर व्यवस्था सुधारने की मांग की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो उपभोक्ताओं को साथ लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
ये है तीन प्रमुख मांगें:-
33/11 केवी और एलटी लाइनों के आसपास लगे पेड़ों की तत्काल कटिंग कराई जाए।
एफआरटी टीम और ग्रिड पर ठेके के अनुसार पूरा स्टाफ लगाया जाए।
उपभोक्ताओं से 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शुल्क लिया जा रहा है तो निर्बाध 24 घंटे आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल यह है कि पुर के उपभोक्ताओं को बार-बार अंधेरे में रखने वाली इस व्यवस्था पर जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंखें मूंदे रहेंगे?